जीतने को बेताब कांग्रेस

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मध्यप्रदेश (MP News In Hindi) में बदलाव की बयार चली तो 13 साल से सत्ता पर काबिज शिवराज सरकार की मजबूत जड़ें भी हिल गईं। मध्यप्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ, और जीत को तरस रही कांग्रेस को राहत मिली। कमलनाथ मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन हुए और ‘मामा’ के रूप में अपनी पहचान बना चुके शिवराज सिंह को, मध्यप्रदेश की जनता से अलविदा कहना पड़ा। मध्यप्रदेश में तो सत्ता परिवर्तन हो गया लेकिन मध्यप्रदेश की ही एक लोकसभा सीट पर आज भी कांग्रेस जीत को तरस रही है। मध्यप्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से सतना लोकसभा सीट पर पिछले 28 वर्षों से सतत भाजपा का राज रहा है।

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राज्य में चल रही बदलाव की बयार इस बार इस सीट पर अपना क्या असर डालेगी यह तो आगामी लोकसभा चुनाव के परिणाम से ही साफ़ हो सकेगा। फिलहाल इस सीट पर किसे कितनी जीत मिली इसके बारे में हम आपको बता देते हैं। कांग्रेस के दिग्गज नेता अर्जुन सिंह सतना की इसी सीट से सांसद रह चुके हैं। हालांकि सतना लोकसभा सीट से 6 बार बीजेपी को, 4 बार कांग्रेस को, 1 बार बसपा को और 1 बार भारतीय जनसंघ को जीत हासिल हो चुकी है। इस लोकसभा सीट पर 1967 में पहली बार चुनाव हुआ था, जिसमें कांग्रेस के डीवी सिंह ने जीत का परचम लहराया था। दूसरी बार के चुनाव में सत्ता परिवर्तन हुआ और यह सीट भारतीय जनसंघ के वीबीएस देव के खाते में चली गई।

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हालांकि इस सीट पर दोनों ही पार्टी अपना जादू बरकरार नहीं रख सकी और तीसरी बार के चुनाव में, भारतीय लोकदल ने बाजी मारी और सुखेंद्र सिंह यहां से सांसद बने। शुरुआत के तीन चुनाव में यह लोकसभा सीट परिवर्तनशील रही और यहां किसी भी पार्टी का टिकना मुश्किल था। वहीं चौथी बार के चुनाव में कांग्रेस ने गुलशेर अहमद को मैदान में उतारा। गुलशेर अहमद ने पार्टी के फैसले को सही साबित करते हुए जीत दर्ज की। इसके बाद कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बदला लेकिन फिर भी जीत उनकी झोली में आई। चौथा और पांचवा चुनाव कांग्रेस ने जीता लेकिन अगले चुनाव में भाजपा ने उसे करारी शिकस्त दी।

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हार का दंश झेल रही कांग्रेस ने इस सीट से अगले चुनाव में अपने दिग्गज नेता अर्जुन सिंह को मैदान में उतारा। अर्जुन सिंह ने भाजपा को मात देते हुए जीत हासिल की। भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रही जंग को उस वक़्त झटका लगा जब बसपा ने दोनों का खेल बिगाड़ते हुए इस सीट पर जीत हासिल की। हालांकि इसके बाद 1998 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जबरदस्त वापसी की और तभी से यह सीट भाजपा के कब्जे में है। पिछले 5 चुनावों में भाजपा को शिकस्त देने की हर कोशिश नाकाम रही है।

इस सीट पर गणेश सिंह का जादू कुछ ऐसा चला कि, पिछले तीन चुनाव से वे यह सीट जीतते आ रहे हैं। गणेश सिंह को हारने के लिए चला गया कांग्रेस का हर दांव फेल रहा, और गणेश के तिलिस्म को तोड़ने में कांग्रेस लगातार नामयाब साबित हुई। फिलहाल राज्य में बदलाव देखने को मिला है, ऐसे में गणेश का जादू कितना काम करता है यह देखना दिलचस्प होगा।

(प्रभात)

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