आचार संहिता नहीं, मोदी प्रचार संहिता

0

लोकसभा चुनाव (2019 Lok Sabha Election Campaign) के अंतिम चरण के लिए प्रचार किया जा रहा है। इसे लेकर देश के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सभी राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला बढ़ गया है। सभी दल वोटरों को लुभाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। इसी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच कांग्रेस (Indian National Congress) के साथ विपक्ष की कई पार्टियों ने चुनाव आयोग (Election Commission of India) को ही घेरे में ले लिया। दरअसल, बंगाल में भड़की हिंसा के बाद चुनाव आयोग (Election Commission) ने वहां प्रचार को जल्दी समाप्त करने का निर्णय सुनाया है। राज्य में 16 मई की रात को ही चुनाव प्रचार रोकने के फैसले पर सवाल खड़े कर दिए हैं।  कांग्रेस पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) ने कहा कि आज लोकतंत्र के इतिहास का ‘काला दिन’ है क्योंकि आयोग ने प्रक्रिया का पालन नहीं करते हुए सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) को रैलियों की इजाजत दी है। 16 मई की शाम को पीएम मोदी (PM Narendra Modi) की रैली होगी, जिसके बाद पश्चिम बंगाल में प्रचार का समय समाप्त हो जाएगा।

हिन्दू आतंकवादी के बयान पर कमल हासन पर फेंकी चप्पल

चुनाव आयोग (Election Commission) के इस फैसले के बाद कई विपक्षी दलों ने आयोग से सवाल किया है और पूछा है कि रात के बजाय सुबह दस बजे से प्रचार पर बैन क्यों नहीं लगाया।  सपा प्रमुख अखिलेश यादव, सीपीआई नेता येचुरी ने इस सिलसिले में ट्वीट भी किये हैं। पश्चिम बंगाल में पीएम मोदी की दो रैली है, और चुनाव आयोग ने इन रैलियों के बाद ही रात दस बजे से राज्य में प्रचार बंद करने का फैसला किया है।

23 मई को मोदी की सत्ता का आखिरी दिन!

कांग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला ने कहा, ” अब मोदीजी को 16 मई को रैलियों की इजाजत दी गई और दूसरे सभी लोगों को प्रतिबंधित कर दिया गया। कभी एक स्वतंत्र संवैधानिक इकाई रही संस्था में शर्मनाक गिरावट है।” पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने ट्वीट कर कहा, “अगर बंगाल में स्थिति इतनी ही खराब है तो चुनाव प्रचार रोक दिया जाना चाहिए। चुनाव आयोग गुरुवार तक का इंतजार क्यों कर रहा है? क्या इसलिए ऐसा किया जा रहा है कि गुरुवार को प्रधानमंत्री की रैलियां होनी हैं? क्या यह अप्रत्याशित नहीं है कि चुनाव आयोग यह दावा कर रहा है कि पश्चिम बंगाल में यह अप्रत्याशित परिस्थिति है, लेकिन वह फिर भी प्रधानमंत्री की चुनावी सभाएं संपन्न होने की प्रतीक्षा कर रहा है?”

नीतीश कुमार को लेकर गुलाम नबी आजाद का खुलासा

Share.