Hindi Kahani : पंडित को वेश्या से मिला ज्ञान

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बहुत समय पहले की बात (Hindi Kahani) है, एक गांव में एक विद्वान पंडित रहा करते थे। पंडित जी बहुत ज्यादा विद्वान थे। उन्हें हर चीज़, हर परिस्थिति और हर शास्त्र का ज्ञान था। फिर भी उन्हें अपना ज्ञान अधूरा लगता था। एक बार पंडित जी ने काशी जाने और अपने ज्ञान को बढ़ाने का विचार किया। पंडित जी कई वर्षों तक काशी में रहे और नित नए शास्त्रों का अध्ययन करने लगे। कई वर्षों बाद शास्त्रों का पूरी तरह से अध्ययन करने के बाद पंडित जी गांव वापस लौट आए।

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पंडित जी को हर चीज़ का ज्ञान हो चुका था। उनकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फ़ैल चुकी थी। लोग उनके पास अपनी समस्या लेकर आते और पंडित जी क्षण भर हर समस्या का समाधान कर देते। पंडित जी की ख्याति सुन एक गरीब किसान उनके पास अपना सवाल लेकर पंहुचा। पंडित जी ने कहा कि क्या समस्या है तुम्हारी। इस पर किसान ने कहा कि पंडित जी मेरी कोई समस्या तो नहीं, बस एक छोटा सा सवाल है जिसका जवाब मुझे आज तक किसी से नहीं मिला।

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किसान ने कहा पंडित जी मेरा सवाल है कि, इस दुनिया में आखिर ‘पाप का गुरु’ कौन है? किसान का सवाल सुनकर पंडित जी परेशान हो गए। उन्हें अपना ज्ञान फिर से अधूरा लगने लगा। उन्हें हर किसी के गुरु के बारे में सुना था लेकिन पाप का गुरु? यह उन्हें विचलित कर रहा था। उन्होंने बहुत प्रयास किया लेकिन इसका जवाब उन्हें नहीं मिला। आखिरकार परेशान होकर पंडित जी ने फिर से काशी जाने और इस सवाल का जवाब ढूढ़ने का निश्चय किया।

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पंडित जी काशी पहुंचे अपने गुरुओं से मिले और उन्हें अपनी समस्या सुनाई। पंडित जी के गुरु भी यह सवाल सुनकर दंग रह गए। उन्होंने कहा की इस सवाल का जवाब तो उनके पास भी नहीं है। पंडित जी यह सुनकर निराश हो गए। पंडित जी अब इस सवाल के जवाब में भटकने लगे और बड़े-बड़े ज्ञानियों से यही सवाल पूछते। हर जगह उन्हें सिर्फ निराशा ही हाथ लगती। एक बार एक गांव में उनकी मुलाकात एक वेश्या से हो गई। वेश्या ने उन्हें प्रणाम किया और पूछा विप्रवर आप बहुत परेशान दिख रहे हैं। अपनी परेशानी बताएं। पंडित जी ने कहा कि उन्हें एक सवाल के जवाब की तलाश है। उसी ने मुझे परेशान कर रखा है और में उसकी तलाश में भटक रहा हूं। वेश्या ने कहा मुझे बताइए शायद में आपकी कुछ मदद कर सकूं। पंडित जी ने सोचा कि बड़े-बड़े ज्ञानी इसका जवाब नहीं दे सके और मैं कई समय से भटक रहा हूं। इसे भी सवाल बता देता हूं।

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पंडित जी ने उससे भी वही सवाल पूछा। पंडित जी का सवाल सुनकर वेश्या मुस्कुराई और कहा, पंडित जी इस सवाल का तो बहुत ही सरल सा जवाब है। पंडित जी यह सुनकर खुश हो गए। उन्होंने कहा तो जल्दी से मुझे इसका उत्तर दो। वेश्या ने कहा कि सवाल का जवाब जानने के लिए आपको मेरे साथ मेरे पड़ोस में कुछ दिन रहना पड़ेगा। पंडित जी को जवाब जानना था इसलिए उन्होंने हामी भर दी। वेश्या ने पंडित जी के लिए उत्तम व्यवस्था का प्रबंध कर दिया। पंडित ने कहा कि मैं सिर्फ अपने सवाल का जवाब जानने के लिए यहां रुक रहा हूं लेकिन अपने नियम और धर्म के विरुद्ध नहीं रहूंगा। वेश्या ने कहा कि ठीक है।

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पंडित जी किसी के हाथ का पानी तक पीना पसंद नहीं करते थे। इसलिए उन्होंने स्वयं ही अपना हर कार्य करना उचित समझा। ऐसा करते हुए कई दिन बीत गए लेकिन पंडित जी को अपने सवाल का जवाब अभी तक नहीं मिला। एक दिन वेश्या पंडित जी से बोली कि, आपको स्वयं अपना कार्य करना पड़ता है, आपको इससे तकलीफ उठानी पड़ रही है। अगर आप बुरा न माने तो मैं आपके लिए खाना पका दिया करूंगी। पंडित जी ने कहा कि यह उनके नियम-धर्म के खिलाफ है। वेश्या ने पंडित जी से फिर कहा कि बस आपको आपके सवाल का जवाब मिलने ही वाला है। उसने कहा कि मैं सुबह स्नान कर पूरी स्वच्छता से आपको भोजन पका दूंगी। और आपके इस उपकार के बदले 5 स्वर्ण मुद्राएं रोजाना दक्षिणा भी दूंगी।

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इससे मैं भी कुछ पुण्य कमा सकुंगी। पंडित जी ने सोचा कि, यह तो बहुत ही अच्छी बात है। मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी, सवाल का जवाब भी मिलेगा और दक्षिणा भी। उन्होंने सोचा कुछ दिन की ही बात है और फिर भला आई हुई लक्ष्मी को कौन ठुकरा सकता है। उन्होंने हां कह दिया। अगले दिन ही उस वेश्या ने पंडित जी के सामने छप्पन भोग रख दिए। पंडित जी बहुत खुश हुए। जैसे ही पंडित जी ने खाने के लिए अपना हाथ बढ़ाया वेश्या ने थाली खींच ली और कहा, पंडित जी मैं क्षमा चाहती हूं। पंडित जी थोड़ा रुष्ट हुए लेकिन कारण पूछा क्यों? वेश्या ने कहा कि आपके नियम के विरुद्ध मैं आपको खाना खिला रही हूं, जबकि आप किसी के हाथ का पानी भी नहीं पीते।

पंडित जी को तत्काल ही अपने सवाल का जवाब मिल गया। उन्होंने वेश्या को धन्यवाद कहा। वेश्या मुस्कुराते हुए बोली पंडित जी पाप का गुरु यह धन ही है, जिसके कारण आप अपना नियम-धर्म भी छोड़ने को तैयार हो गए। पंडित जी को सवाल का जवाब मिल चुका था। उन्होंने वेश्या को आशीर्वाद और धन्यवाद दिया और प्रसन्न होकर वापस गांव लौट गए।

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