Motivational Story : पहले खुद को तो बदलो

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दोस्तों कई बार ऐसा होता है कि हम खुद ही अपनी ख़ुशी अपने आनंद अपने उत्साह या यों कहें की अपनी सफलता के रास्ते में रोड़ा बन जाते हैं बाधक बन जाते हैं और कई मामलों  में  तो हमें इस बात का पता भी नहीं होता की हम खुद ही अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं। ये कुल्हाड़ी क्या है ये है हमारे अंदर हमारे मन में पैदा होने नकारात्मक विचार  नकारात्मक सोच। अब ये होते कैसे हैं –

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जैसे मान लीजिये आपके मन में विचार आता है कि  मै कोई काम का नहीं हूँ  या ये काम मेरे बस का नहीं है या ” मैं भद्दा दीखता हूँ”, या ,”मेरा पति मुझसे प्यार नहीं करता.”, या “मुझे अंग्रेजी नहीं आती.”, या ,” मेरा IQ कम है” वगैरा वगेरा।  तो ये मान कर चलिए की कहीं ना कहीं ये आपके व्यक्तित्व विकास में hurdle बन रहे हैं.और फिर धीरे धीरे आपके अंतर्मन में इन नकारात्मक विचारों की एक बैंक बन जाती है।

जो आपके व्यवहार में आपकी भाषा शैली में भी दिखाई देने लगती है आप बहुत अच्छी और खूबसूरत चीजों में भी नकारत्मकता ही ढूंढने लगते हैं। मसलन आप ताज महल देख रहे हैं दुनिया के 7 अजूबों में से एक। आपके इर्दगिर्द लोग उसकी प्रशंसा कर रहे हैं सेल्फी ले रहे हैं और उस वक़्त आप क्या सोच रहे हैं आप सोच रहे हैं की अब ये पहले जैसा नहीं रहा,थोड़ा पीला हो रहा है एयर और वाटर पोलुशन की वजह से, लोग भी यहाँ बहुत गंदगी करने लगे हैं यहाँ के सुरक्षा गार्ड भी ढंग  से काम नहीं कर रहे हैं फलाना ढिमका ये ओर वो।  मतलब सारी  नकारात्मकता आपके हिस्से में आ गई और ये लाया कौन आप खुद।

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इससे हुआ क्या इससे ये हुआ की आपकी ताजमहल ट्रिप बेकार हो गई। आप जब घर पहुँचते हैं तो आप क्या देखते हैं की आपके सिवाय परिवार का हर कोई सदस्य वहां लिए हुए फोटोज को देखकर ताजमहल की तारीफ कर रहा है। और आप उनसे असहमति जताते हुए सीधेअपने तर्क को मजबूत बताने के लिए बहस के उस चरम शीर्ष पर पहुँच जाते हैं की मुगलों ने भारत पर आक्रमण कर यहाँ की सांस्कृतिक हानि की है और उनके द्वारा बनाये गए ताजमहल को देखकर हम अप्रत्याशित रूप से मुगलों का समर्थन कर रहे हैं।

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मान लीजिये बड़े प्यार से आपकी पत्नी ने ये मम्मी ने या बहन ने आज खाने में वो बनाया है जो आपको बेहद पसंद है। 3 घंटे रसोई में मेहनत  कर आपकी बनाई हुई डिश जैसे ही आपकी थाली में आई आपके मुँह से पहला dilog निकला ”अरे वाह ” बस फिर क्या था बनाने वाला खुश।

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लेकिन इस ख़ुशी को वो ज़ाहिर करे उसके पहले ही पेश ए खिदमत हो गया आपका दूसरा dilog – हम्म अच्छा तो बना है लेकिन बस एक दाने से मार खा गए। और फिर आप बनाने वाले की सारी भावनाओं पर पानी फेरते हुए खुद को एक महान खानसामा बताने की कोशिश करते हुए  न जाने कहाँ कहाँ से ऐसी कमियां निकालते हैं जैसे हल्का सा नमक कम है ,जरा सी मिर्ची ज्यादा है, थोड़ी सी शक्कर कम है , चटनी और हो जाती तो मज़ा ही कुछ और था सलाद साथ में होता तो क्या बात थी वगेरा वगेरा, बस दिला दिए न सामने वाले की आँखों में आंसू ,छीन लिए न खुशियों के पल. अब मिल गई आपके कलेजे को ठंडक।

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ऐसा एक ही नहीं कई बातों में आपके साथ इसलिए होता है क्योंकि आपके मन में एक बैंक बन चूका है नकारात्मक विचारों का। और कई बार तो ये नकारात्मक विचार इतने प्रबल हो जाते हैं की आपके जीवन के साथ खिलवाड़ करने तक के हो जाते हैं जैसे आत्महत्या का विचार। अब सवाल ये है की इसे दूर कौन करेगा इन नकारात्मक विचारों को सकारात्मक में बदलेगा कौन ? कोई नहीं ,ये सब आपको ही करना होगा। क्योंकि ये बोया भी आपने ही है तो काटेंगे भी तो आप ही न।

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दरअसल आपने आधा गिलास आधा देखने की आदत पाल रखी है। प्रशंसा करना आप भूल चुके हैं। दूसरों की भी और खुद की भी। जब तक आप तारीफ करेंगें नहीं तो मिलेगी कैसे वो कहते हैं की बोया पेड़ बाबुल का तो आम कहाँ से पाओ। हर किसी की प्रशंसा करना सीखिए ओहदे में छोटे लोगों की भी। छोटे छोटे काम की प्रशंसा करना सीखिए  तारीफ कीजिये।

कोई अगर आपकी या आपके किसी काम की बुराई भी करे तो उसे धन्यवाद दीजिये एक इस्माइल के साथ और एक वायदे  के साथ की अब देखिये इसे और बेहतरीन करके दिखता हूँ। सामने वाला आपका मुरीद हो जायेगा।  अगर लोग आपके साथ बैठना घूमना बात करना पसंद करने लगे आपको सुन्ना पसंद करने लगे तो समझ लीजियेगा की आपके अंदर की नकारात्मक विचारों की बैंक अब सकारात्मकता में बदल चुकी है। क्योंकि दूसरों की प्रशंसा करते करते आपको पता ही नहीं चलेगा की आप सभी के प्रशंसनीय हो गए हो। सम्मानीय हो गए हो प्रतिष्ठित हो गए हो।

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