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Hindi Kahani : मिठास से भरा कड़वा सच

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इंग्लैंड के राजा में काव्य प्रतिभा औसत दर्जे की थी लेकिन वे अपने आपको एक महान कवि समझते थे। वे कविताएं लिखते और अपने दरबार में दरबारियों को सुनाते। फिर खुद ही अपनी कविताओं की तारीफ भी करते। ऐसा करने से दरबारियों की भी उनकी हां में हां मिलानी पड़ती थी। पर दरबारी इसके अलावा कुछ कर भी नहीं सकते थे। दरबारियों को भले ही राजा की कविता पसंद नहीं आती हो, लेकिन उन्हें तारीफ करनी ही पड़ती। क्योंकि उन्हें पता था कि राजा को अपनी कविता लेखन से बेहद प्रेम है। और दरबारी सच बोलकर राजा के कोप का भाजन नहीं बनना चाहते थे।

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एक बार राजा ने जॉर्ज बर्नार्ड शॉ को अपने महल में आमंत्रित किया। राजा अपनी कविता के बारे में जॉर्ज बर्नार्ड शॉ की राय जानना चाहता था। राजा ने दरबारियों के सामने अपनी कविता का पाठ किया। और जॉर्ज बर्नार्ड शॉ से कहा कि वो उसकी लिखी कविता के बारे में अपनी राय दें।

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जॉर्ज बर्नार्ड शॉ सोच में पड़ गए। उन्हें कविता सुनकर राजा के कविता लेखन का स्तर तो पता चल ही गया था। लेकिन वह कड़वा सच बोलकर राजा को नाराज नहीं करना चाहते थे। इसलिए जॉर्ज बर्नार्ड शॉ ने राजा से कहा, “मैं तो आपसे यही कहूंगा कि आपके लिए कोई भी काम असंभव नहीं है। अगर आप एक ख़राब सी कविता लिखना चाहते हैं, तो उसमे भी सफल हो जाते हैं।” जॉर्ज बर्नार्ड शॉ की बात सुनकर राजा को सब समझ में आ गया और इतने लोगों के बीच भी इस बात को सुनकर राजा को जरा भी बुरा नहीं लगा। बात में मिठास हो तो सच भी कड़वा नहीं लगता। बोलने वाले का सच बोलने का उद्देश्य भी पूरा हो जाता है, और सुनने वाले को बात भी समझ आ जाती है।

सार – सच हमेशा कड़वा होता है और लोग सच सुनकर बुरा मान जाते हैं। लेकिन अगर बोलने की कला हो तो सच भी कड़वा नहीं लगता। किसी से उसके बारे में सच भी बोलो तो इस तरह से कि उसे बुरा भी न लगे और वह सब कुछ समझ भी जाए।

गलती का पश्चाताप

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