कल आकर जवाब दूंगा

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एक बहुत बड़ी कंपनी का मालिक अपनी के यात्रा के दौरान एक छोटे से गांव से गुजर रहा था | तभी वह अचानक वह लोगों का हुजूम आ गया और उन्हें अपशब्द कहने लगा | कुछ ने उनके साथ अभद्र व्यवहार भी किया | इस पर शांति से कंपनी के मालिक ने कहा आपलोगो को मैं कल आकर जवाब दूंगा| फिर वह वहां से चला गया | यह देख लोग बहुत हैरान थे | सारा नजारा देख रहे एक फकीर ने उनका पीछा किया और उनके निवास पर जाकर उनसे पूछा कि ग्रामीणों ने तुम्हारा अपमान किया है, तुम्हारे बारे में अभद्र बातें कहीं और तुम उनसे झगड़ने की बजाए शांति से कल आकर उत्तर देने की बात कर रहे थे और बहा से चले भी आये (Hindi Kahaniya)|

तुम इतने बड़े आदमी हो चाहते तो गांव वालो को सबक सीखा सकते थे | तुमने ऐसा क्यों नहीं किया | तब उस व्यक्ति ने उत्तर दिया ‘पहले मैं घर जाकर सोचूंगा कि लोगों ने जो अपमान किया है, कहीं वह ठीक तो नहीं| हो सकता है, तुम लोगों ने जो बुराइयां मुझमें बताई हैं, वे सचमुच मुझमें हों| इसीलिए पहले मैं जांच करूंगा| फिर कल आकर उत्तर दूंगा| इसमें झगड़ा कैसा?’ उसकी बात सुन फ़क़ीर को का सर उसके सम्मन में झुक गया और उसने सारा माजरा गांव वालो को सुनाया | अब अलगे दिन जब कंपनी का मालिक गांव पे गया तो लोग अपने किये पर शर्मिंदा थे और लज्जा से उनकी नजरें झुकी हुई थी|

सार यही है कि हमें किसी भी बात का तुरंत उत्तर देने की बजाए शांति से सोचना चाहिए और विचार करना चाहिए| इसके बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचना चाहिए | मालिक गलत हो सकता था लेकिन ग्रामीण लोगों ने जो आक्रोश दिखाया वह कहा तक सही था | क्रोध और जल्दबाजी कि बजाय शांत मन से निर्णय ले |

सिलसिला ख़त्म हुआ जलने जलाने वाला…

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