Hindi Kahani : अनपढ़ के आगे डॉक्टर-इंजीनियर नतमस्तक

0

एक घर में तीन भाई और एक बहन थी। बड़ा और छोटा पढ़ने में तेज थे। मां-बाप चारों भाई-बहनों से बेहद प्यार करते थे। हालांकि मझले बेटे से थोड़ा परेशान थे। बड़ा बेटा पढ़-लिखकर डॉक्टर बन गया। छोटा-भी इंजीनियर बन गया। मगर मझला बिल्कुल अवारा और गंवार ही रहा। सबकी शादी हो गई। बहन और मझले को छोड़ दोनों भाईयों ने लव मैरीज की थी। बहन की शादी भी अच्छे घराने में हुई थी। अब मझले बेटे चंदू को कोई लड़की नहीं मिल रही थी। माता-पिता को बस यही परेशानी थी। बहन जब भी मायके आती, सबसे पहले छोटे भाई और बड़े भैया से मिलती। मगर चंदू से कम ही मिलती थी। क्योंकि वह न तो कुछ दे सकता था और न ही समय पर घर पर रहता था।

कुछ समय यहां-वहां भटकने के बाद चंदू ने दिहाड़ी मजदूरी शुरू कर दी। ऐसे ही एक दिन पिता का निधन हो गया। अब मां ने सोचा, भाइयों के बीच बंटवारे की बात उठे इससे पहले चंदू की शादी करना जरूरी है। उन्होंने गांव की एक सीधी-सादी लड़की देखी और चंदू की शादी कर दी। शादी के बाद चंदू सुधर गया। वह अपने काम पर ध्यान देता और बाकी समय परिवार के साथ गुजारता था। वह अपने दोस्तों से कहता था, कल तक मैं अकेला था। अब दो पेट हैं। इसलिए मुझे मेहनत करना होगी। इस बीच, बड़ा और छोटा भाई तथ उनकी पत्नियां बंटवारे का फैसले करते हैं। मां के लाख मना करने पर भी बंटवारा की तारीख तय होती है। बहन भी आ जाती है, मगर चंदू है कि उस दिन काम पर जाने के लिए तैयारी करता है। मां ने उसे समझाया कि आज तेरे भाई बंटवारा कर रहे हैं, वकील भी आ गया है, आज तो रुक जा।

चंदू मां से कहता है, मेरे भाई, जो भी बंटवारा करेंगे, मुझे मंजूर होगा। शाम को आऊंगा और वकील जहां करेगा अंगूठा लगा दूंगा। वकील ने कहा, चंदू को रुकना होगा क्योंकि सभी के साइन अभी होंगे। आखिर चंदू को रुकना पड़ा। बंटवारे में परिवार की कुल दस बीघा जमीन में से दोनों भाई 5-5 बीघा जमीन रख लेते हैं। चंदू के लिए पुश्तैनी घर छोड़ दिया जाता है। क्योंकि दोनों भाई अब दूसरे शहरों में रहते हैं और वे इस घर नहीं आना चाहते। भाइयों ने जैसे ही बताया कि इसके साथ ही बंटवारा हो गया, तो चंदू जोर से चिल्लाया। ‘अरे…हमारी छुटकी का हिस्सा कौन-सा है?’ दोनों भाई हंसकर बोलते हैं, ‘अरे मूर्ख, बंटवारा भाईयो में होता है और बहनों के हिस्से में सिर्फ उसका मायका ही है।’ यह सुनते ही चंदू बोले- ‘ओह, शायद पढ़ा-लिखा न होना भी मूर्खता ही है। ठीक है आप दोनों ऐसा करो। मेरे हिस्से की वसीयत छुटकी के नाम कर दो।’

दोनों भाई चकीत होकर बोलते हैं, ‘और तू?’ चंदू ने मां की ओर देखा और कहा, ‘मेरे हिस्से में मां है।’ फिर अपनी पत्नी की ओर देखकर बोलता है, ‘क्या मैंने गलत कहा?’ चंदू की पत्नी ने अपनी सास से लिपटकर कहा, ‘इससे बड़ी वसीयत क्या होगी कि मुझे मां जैसी सास मिली और बाप जैसा ख्याल रखना वाला पति।’ यह बात सुनते ही वहां सन्नाटा पसर गया। बहन दौड़कर अपने गंवार भैया से गले लगकर रोते हुए कहती है, ‘मांफ कर दो भैया, मैं समझ न सकी आपको।’ दोनों भाइयों को भी अपनी गलती का अहसास हो चुका था। बंटवारा रोक दिया गया और तय हुआ कि सभी भाई-बहन मिल जुलकर रहेंगे। कहानी का सार यह है कि बुद्धि मत्ता और समझदारी का रिश्ता तो है मगर अशिक्षित में कोई ज्ञान नहीं है यह धारणा बिलकुल गलत है|साभार |

Hindi Kahani : इससे मार्मिक कहानी शायद ही आपने कभी पढ़ी हो?

Hindi Kahani : शक्ति और उसका एहसास जरुरी है, किन्तु ………

Motivational Story : इनकी कीमत दो आने….

अभिषेक

रहें हर खबर से अपडेट, ‘टैलेंटेड इंडिया’ के साथ| आपको यहां मिलेंगी सभी विषयों की खबरें, सबसे पहले| अपने मोबाइल पर खबरें पाने के लिए आज ही डाउनलोड करें Download Hindi News App और रहें अपडेट| ‘टैलेंटेड इंडिया’ की ख़बरों को फेसबुक पर पाने के लिए पेज लाइक करें – Talented India News

Share.