website counter widget

Hindi Kahani : सच्चाई हमेशा ख़ुशी देती है…

0

विक्की बहुत खुश था। क्योंकि कल उसके स्कूल में स्वतंत्रता दिवस का समारोह था। स्कूल को अच्छी तरह से रंग बिरंगी झंडियों से सजाया जाएगा। प्रधानाचार्य हमारा प्यारा तिरंगा फहराएंगे और फिर रंगा-रंग एक कार्यक्रम भी होगा। इसी उत्साह से जब वह घर पहुंचा तो उसके होश उड़ गए। पिताजी के सीने में बहुत ज़ोर से दर्द हो रहा था और सब डॉक्टर के आने का इंतज़ार कर रहे थे। कुछ देर में डॉक्टर साहब भी आ गए और उपचार शुरू कर दिया।

Hindi Kahani : प्रोत्साहन का महत्व

दवा से दर्द कम हुआ तो पिताजी कुछ शांत हो सो गए। डॉक्टर ने कहा कि समय पर दवा देते रहें और अगर दर्द फिर होता है तो पिताजी को फ़ौरन अस्पताल ले जाएं। पूरी रात विक्की और उसकी और मम्मी पिताजी की देखभाल में लगे रहे। सुबह करीब 4 बजे पिताजी को दर्द फिर से शुरू हो गया तो मम्मी ने फ़ौरन एम्बुलेंस को फ़ोन लगाया। कुछ देर में एम्बुलेंस आ गई और पिताजी को लेकर अस्पताल पहुंच गई। वहां डॉक्टरों ने उनका इलाज़ शुरू किया और दोपहर होते-होते उन्हें भला चंगा कर अस्पताल से छुट्टी दे दी।

रोज़ दवा खाने और कुछ चीज़ों से परहेज करने की सलाह दी। जब सभी घर पहुंचे तो शाम हो चुकी थी। पिताजी को बिस्तर पर लिटाने के बाद विक्की को ख़याल आया कि आज तो स्कूल में स्वतंत्रता दिवस का समारोह था। पिताजी की तबियत ख़राब होने की वजह से वो पूरी तरह से भूल ही गया था। मायूसी तो हुई पर पिताजी का अच्छा स्वास्थ ज्यादा जरूरी था।

Hindi Kahani : रसगुल्ले की जड़

अगले दिन प्रधानाचार्य बहुत गुस्से में थे क्योंकि उस समारोह में बहुत से छात्र नहीं आए था। हालांकि उन्होंने एक दिन पहले ही सबको स्वतंत्रता दिवस का महत्व समझाया था और आदेश दिया था कि सब छात्रों को उस में सम्मिलत होना है। फिर क्या था, उन छात्रों की सूची बनाई गयी जो बिना इजाजत के नहीं आए थे। उन सबको क्लास में खड़ा किया गया और प्रधानाचार्य ने खूब डांटा। बाकी सब बच्चे खामोश बैठे उन बच्चों को दंड प्राप्त करते देखते रहे। सब को दंड देकर जब प्रधानाचार्य जाने को हुए तो विक्की खड़ा हो गया। अपनी जगह से उठकर वह प्रधानाचार्य के सामने पहुंचा और बोला – सर, आप मेरा नाम लेना भूल गए। मैं भी कल अनुपस्थित था।

यह सुन प्रधानाचार्य अपना गुस्सा भूल मुस्कुराने लगे। विक्की के कंधे पर हाथ रख बोले – जिस छात्र में अपनी गलती मानने की हिम्मत है वो कभी दंड का हक़दार नहीं हो सकता। मैं नहीं पूछूंगा कि किस कारण तुम कल अनुपस्थित थे, लेकिन वादा करो कि कभी सच का साथ नहीं छोड़ोगे। और वे उसकी पीठ थपथपाते हुए कक्षा से बाहर चले गए… विक्की को एक ख़ुशी की अनुभूति हुई और उसके मन से बोझ भी उतर गया।

Hindi Kahani : किसान की बेटी

सार – जीवन में हमें कभी सच का साथ नहीं छोड़ना चाहिए चाहे हमसे कुछ गलत भी क्यों न हो जाए। सच बोलने से हमेशा ख़ुशी प्राप्त होती है। हिंदी टीचर ऑनलाइन से साभार।

Summary
Review Date
Author Rating
51star1star1star1star1star
ट्रेंडिंग न्यूज़
Share.