Hindi Kahani : महिलाओं का खुला राज़

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आज पता चला माँ रसोई में, पैसे माँगने पर क्यों जाती थी। जब रेखा भी वही काम शादी के बाद करने लगी। एक दो बार जतिन ने नज़र अंदाज किया पर जब वो भी माँ की तरह करने लगी तो उससे रहा नही गया और रेखा से पूछ बैठा ।ये बताओ पहले माँ ऐसा करती थी कि जब भी पैसे माँगों रसोई में अभी आई कहके चली जाती और वही तुम भी करती हो।आखिर तुम लोग रसोई में क्यो जाती हो।

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तो रेखा ने कहा हू………राज़ जानना चाहते हो औरतों का? मैं नही बताती जाओ…क्या तुम लोग अपनी कमाई बताते हो क्या कभी कि कितना कमाते हो।
फिर हम अपना राज क्यों बताये,  चलो भाई न बताओ॥ मैं ज्यादा तुम्हे फोर्स भी नही करूँगा। उस समय तो लापरवाही से टाल दिया, पर बात आई गई खत्म नही हुई । जतिन में जानने की उत्सुकता बनी रही।

एक दिन ये हुआ कि वो रसोई में खड़ा होके चाय बना रहा था। इतने में दूधवाला हड़बड़ाते हुए आया और बोला बीबीजी हमरी जोरू को हस्पताल ले जाना है अबही के अबही ऊँ काहे न की ओके टेम नजदीक है डागडर कही न है की पेट चीरे परी बच्चे का गला फँसा है।

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बस फिर क्या था रेखा ने आव देखा न ताव और झट से बिना ये ध्यान दिए की जतिन चाय बना रहा है चावल का डब्बा खोली उधारी के चार हजार मांग रहे राम लाल को रूपये गिन के पकड़ा दिया।जिसे खड़ा हक्का बक्का सा जतिन देखता रह गया। और फिर उसे समझ आया कि माँ और रेखा पैसा माँगने पर रसोई में क्यो आती थी।

पलटकर जब रेखा ने देखा तो जतिन को मुस्कुराता देखकर समझ गई कि आज उसकी चोरी पकड़ी गई।

पर जतिन के चेहरे पर एक अजीब सा सुकून देखकर खुश हुई।और उससे ज्यादा खुशी तब हुई जब जतिन ने उसकी ठुड्डी उठाकर आँखों मैं आँखें डालते हुए ये कहा कि आज समझ में आया कि औरत अन्नपूर्णा ही नही लक्ष्मी भी होती है। वो पैसे एक जगह नही रखती बल्कि रसोई में रखे हर छोटे-बड़े डिब्बे में छुपाकर रखती है, जिससे वक्त जरूरत पर काम आए ।

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वाह रे मेरी लक्ष्मी वाह।

लेख़क: कंचन आरज़ू

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