कहानी : जब लड़की ने सिखाया लड़के को समानता का पाठ

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एक कस्बे में होटल का छोटा सा कमरा, जहां विवाह की बात चलाई जा रही है| लड़का-लड़की को एक-दूसरे को जानने के लिए अकेला छोड़ दिया गया| बिना समय गंवाए लड़के ने पहल कर दी है| मेरा परिवार मेरे लिए सब कुछ है| मां को एक ऐसी बहू चाहिए, जो पढ़ी-लिखी हो, घर के काम में हुनरमंद हो, संस्कारी हो और सबका ख्याल रखे| उनके बेटे के साथ कदम से कदम मिलाकर चले| परिवार पुराने खयालात का तो नहीं, पर यह ज़रूर चाहता है कि ऐसा कोई आए, जो हमारे रीति-रिवाज को अपना ले| परिवार की महिलाएं चश्मा नहीं लगातीं हैं|

लड़का आगे बोलता रहा, भगवान की कृपा से हमारे पास सब कुछ है| हमें आपसे कुछ नहीं चाहिए, बस लड़की घर को जोड़कर रखने वाली चाहिए| मेरी कोई विशेष पसंद नहीं है, बस मुझे समझने वाली लड़की चाहिए, थोड़ा बहुत देश-समाज की भी जानकारी रखती हो| लड़के ने बोलना जारी ही रखा, हां, लंबे बाल और साड़ी वाली लड़कियां अच्छी लगतीं हैं| आपकी कोई इच्छा हो तो अब आप बताइए|

बहुत देर से मौन बैठी लड़की ने लाज का घूंघट हटाकर स्वाभिमान की चूनर सिर पर रख ली और पूरे विश्वास से बोलना शुरू कर दिया, मेरा परिवार मेरी ताकत है, बाबा को दामाद के रूप में ऐसा बेटा चाहिए, जो उनके हर सुख दुख में बिना अहसान उनके साथ खड़ा रहे| बिटिया के साथ घर के काम में कुछ मदद भी करें, जिसे अपनी मां  और पत्नी के बीच पुल बनना आता हो और जो उनकी बेटी को अपने परिवार की ‘केयर टेकर’ बनाकर न ले जाए|

अब लड़की ने बोलना जारी रखा, जीवनसाथी से बहुत उम्मीद तो नहीं, पर ऐसा कोई जो अपनी पत्नी को परिवार में सम्मान दिला पाए, पठानी सूट  में बिना मूंछ-दाढ़ी वाले लड़के पसंद हैं| अपने स्पैक्ट्स को खुद से भी ज्यादा प्यार करती हूं| सरनेम बदलना या न बदलना अपने अधिकार क्षेत्र में रखना चाहूंगी| आप और हम पढ़े-लिखे हैं
तो विवाह का खर्च आधा-आधा दोनों परिवार उठाएंगे| देश के विकास में यह भी एक पहल होनी चाहिए और हर बात सिर झुकाकर मानते रहना संस्कारी होने की निशानी नहीं है|

अब लड़का हकलाने लगा, लड़की कमरा छोड़कर जा चुकी थी | चारों तरफ सन्नाटा पसर गया, कहीं दूर सभ्यता का तराजू मंद-मंद मुस्कुरा रहा था| आज सदियों बाद उसके दोनों पलड़े बराबर जो आए हैं| जब दोनों गाड़ी के पहियों के बिना गाड़ी न चल सकेगी तो एक पहिये को कम क्यों आंका जाए|

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