स्मार्टफ़ोन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक, जनहित में जारी!

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संडे को पार्क में खुली हवा का आनंद लेने के लिए टहलना हो रहा था, तब मेरा ध्यान गया कि मेरे आसपास सभी लोगों की गर्दन नीचे झुकी है| जी हां…! सही समझा आपने! प्राणों में स्फूर्ति भरने वाले और धमनियों में रक्तचाप बढ़ाने वाला हमारा दूरसंचार यंत्र, जो मेज से उठकर हमारी हथेलियों में आ बैठा है| घर की ओर रुख करते वक़्त भी मैंने देखा कि चलता हुआ युवक हो या घर से निकलते हुए अंकलजी हो या दुकान पर ग्राहक को सामान देता दुकानदार…| सभी की गर्दन उस यंत्र से इतनी सम्मोहित थी कि अपने आप झुकी हुई थी|

मनुष्य के कानों ने तो पहले ही हार मान ली है| ईयरफोन से लटकती डोरियां इस पीढ़ी का बुढ़ापे तक पीछा नहीं छोड़ेंगी क्योंकि वे तब भी लटकी रहेंगी ईयर मशीन बनकर|

यही हालात रहे तो डार्विन के सिद्धांत अनुसार, आने वाली पीढ़ियों की गर्दन झुकी हुई होगी और हाथ का अंगूठा थोड़ा छोटा और घिसा हुआ पाया जा सकता है| रही बात सेल्फी ले लेकर आगे आए होठों की तो वह ‘बिंगो’ कंपनी ने अपने विज्ञापन के जरिये घोषणा कर ही दी है|

सोशल मीडिया का रुतबा तो इस हद तक है कि हम इसके द्वारा बड़ी आसानी से जातिभेद कर सकते हैं, जैसे ऑरकुट विलुप्त जाति में आता है, याहू पिछड़ा वर्ग में, फेसबुक सामान्य में, ट्विटर और इंस्टाग्राम सर्वोच्च और गूगल तो हमारी सरकार है, जब कुछ समझ न आए तो उस पर जाकर थोपा जा सकता है और हमारी सहूलियत अनुसार कुछ भी आढ़े-टेढ़े प्रश्न उस पर दाग सकते हैं|

रही बात स्टेटस सिंबल की तो वह भी इसके द्वारा बड़ी ही आसानी से मापने का तरीका हो गया है| एक सेब का चित्र इस दूरसंचार यंत्र पर लगा हो और उसको हाथ में लेकर आप अपना चित्र प्रोफाइल पिक्चर बना लीजिए… लो…हो गए आप इंस्टेंट लखपति…| अरे भाई! लाख रुपए अकाउंट में हो, तब भी तो वह सेब खरीदा जा सकता है न! एक जमाने में बंगला और गाड़ी ही स्टेटस के पैमाने हुआ करते थे, अब वे दोनों आघात हैं| डर इस बात का है कि वे असुरक्षा के अवसाद की अवस्था में न चले जाएं!

यदि उपरोक्त बातों से आप के चेहरे पर हल्की सी भी मुस्कुराहट आई है तो शायद आप मेरा इशारा समझ गए हैं और यदि नहीं आई तो आपकी बेचारी गर्दन! जमाने के साथ चलना ज़रूरी है, दौड़ना नहीं| तो रख दो उस यंत्र को फ्लाइट मोड पर थोड़ी देर और भर लो अपनी ज़िन्दगी की उड़ान!

-बकुल गुप्ता, इंदौर

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