Hindi Kahani : सिकंदर ने जाना आनंद का अभिप्राय

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एक बार सदा खुश रहने वाले डायोजनीज से सिकंदर महान ने पूछा- तुम इतने आनंदित, बेफ्रिक और आराम से कैसे रहते हो?जवाब देने से पहले डायोजनीज ने सिकंदर से पूछा तूम इतने दुखी क्यों हो ? धन, ऐश्वर्य, मान-सम्मान, राजपाट सभी कुछ है, किसी बात की कोई कमी नहीं है |सिकंदर ने कहा,मेरी इच्छा विश्व विजेता बनने की है | मैं संसार का सम्राट बनना चाहता हूँ| विश्व विजय मेरा मकसद है| पूरा विश्व जीतने तक में दुखी और बेचैन रहूंगा |

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डायोजनीज ने कहा- सिकंदर, मान लो कि तुम विश्व विजेता बन गए तब तुम क्या करोगे? सिकंदर अब जवाब नहीं दे पाया | उसने कहा मेने अब तक सोचा ही नहीं था कि विश्वविजेता बनने के बाद मैं क्या करूंगा? सिकंदर थोड़ा रुकने के बाद बोलै विजय के बाद मैं भी तुम्हारी तरह आनंदित होकर आराम करुंगा|

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डायोजनीज हॅसते हुए बोला- सिकंदर अगर तुम बेफिक्र, आनंदित होकर आराम करना चाहते हो तो इसके पहले विश्वविजय नहीं मन पर विजय की जरुरत है | जिंदगी में आनंद का मतलब मन की शांति है,न की विश्वविजय बन धन-दौलत और ऐश्वर्य बटोरना |धन दौलत और माल खजाने वालों को भी नींद नहीं आती है और वहीं सुकून से मन की शांति का धनि व्यक्ति पत्थरों पर भी सो जाता है| मन की शांति (Mann Ki Shanti Story) ही सच्चा धन है | अशांत अमीरी से सुकून की गरीबी कही ज्यादा बेहतर है|

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अभिषेक

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