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हिंदी कहानी : ज़िंदगी अकेले नहीं गुजारी जा सकती

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ज़िंदगी अकेले नहीं गुजारी जा सकती। ऐसे में हमें अपनों की जरुरत होती है, लेकिन अपनों के अलावा भी प्रकृति ने ऐसी कई नेमतें हमें दी हैं, जो जीवन के लिए बेहद ज़रूरी है। हालांकि हम उन्हें प्रत्यक्ष रूप से अपना साथी कम ही मानते है| वे है पशु, पक्षी ये प्रकृति और हमारे आसपास का वातावरण। ज़िंदगी अकेले नहीं गुजारी जा सकती। ऐसे में हमें अपनों की जरुरत होती है, लेकिन अपनों के अलावा भी प्रकृति ने ऐसी कई नेमतें हमें दी हैं, जो जीवन के लिए बेहद ज़रूरी है।

Hindi Kahani : चालाकी की सज़ा

काम की आपाधापी में हम इतने व्यवसायिक हो गए हैं की धन्यवाद भी हम आजकल फ्री में नहीं देते। हम सोचते भी उनके ही बारे में हैं जो हमें प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देते हैं। लेकिन इन सबके बीच हम भूल जाते हैं उन मूक उपकार करने वालों को जो हमें जीवन तो देते हैं पर जताते नहीं हैं। सहारा देने वाले ये वो परोपकारी हैं जिन्हे हम लगभग भूल चुके हैं। लेकिन इसका अंजाम हमे ही भुगतना होगा अगर हम सही समय पर समझें नहीं तो। आइये इसे एक कहानी के माध्यम से समझते हैं..

पानी: मिल रहा है तो ढोलो !

एक बकरी के पीछे शिकारी कुत्ते दौड़े। बकरी जान बचाकर अंगूरों की झाड़ी में घुस गयी। कुत्ते आगे निकल गए। बकरी ने निश्चिंतापूर्वक अँगूर की बेले खानी शुरु कर दी और जमीन से लेकर अपनी गर्दन जहां तक पहुंचे उतनी दूरी तक के सारे पत्ते खा लिए। अब पत्ते झाड़ी में नहीं रहे। छिपने का सहारा समाप्त हो जाने पर कुत्तो ने उसे देख लिया और मार डाला !! सहारा देने वाले को जो नष्ट करता है, उसकी ऐसी ही दुर्गति होती है। मनुष्य भी आज सहारा देने वालीं जीवनदायिनी नदियां, पेड़ पौधो, जानवर, गाय, पर्वतों आदि को नुकसान पंहुचा रहा है और इन सभी का परिणाम भी अनेक आपदाओ के रूप में भोग रहा है। प्राकृतिक सम्पदा बचाओ अपना कल सुरक्षित करो।

गर्मी से परेशान लोगों के लिए राहत बनकर आई बारिश

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