ये कैसी दोस्ती ?

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एक गांव में एक बकरी रहती थी | वो बड़ी मिलनसार और सबसे दोस्ती करने वाले स्वभाव की थी | हर किसी पर भरोसा करती और जल्द ही दोस्ती भी कायम कर लेती थी | कुछ समय बाद वह बकरी बीमार हो गई | अब उसका बाहर जाना, चलना फिरना सब बंद हो गया था | ऐसे में गांव की दूसरी बकरियां जो उसकी सहेलियां थी उससे मिलने पहुंची | तब बकरी ने मन ही मन सोचा की में खाना पानी लाने मै सक्षम नहीं हूं तो क्या हुआ, मै अपने दोस्तों से खाना पानी मंगवा सकती हूं | 

उसका हाल चाल पूछने के बाद जब वें बकरियां जाने लगी तो बाहर रखा उसका चारा खाने और पानी पिने लगी | उन्हें देख कर बकरी को अपनी दोस्ती पर नाज़ की बजाय दुःख होने लगा | उसने सोचा की काश में सभी को दोस्त बनाने की बजाय कुछ सच्चे दोस्त बनती जो मेरे दुःख में मेरे कम आते और मेरे सच्चे हमदर्द बनते|

कहने का तात्पर्य है कि दोस्तों की संख्या ज्यादा न भी हो तो कुछ फर्क नहीं पड़ता, बल्कि दोस्त कम और सच्चे हो तो जीवन के दुःख सुख आराम से कट जाते है| जीवन मे दोस्त परख कर बनाये |

ये कैसी दोस्ती ?

नाम में ही सब रखा है

Short Story In Hindi : अच्छा कौन ?

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