आप भी पढ़ें शंभू शिखर की कविताएं

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शंभू शिखर (Famous Poetry Of Shambhu Shikhar ) एक भारतीय हास्य अभिनेता और कवि हैं। उनका जन्म 10 जनवरी 1984 को बिहार के मधुबनी जिले में हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ आर्ट्स की उपाधि प्राप्त की। उनके पास स्टैंड-अप कॉमेडियन के रूप में व्यापक अनुभव है और वे एक दशक से प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने टीवी और रेडियो कार्यक्रमों पर काम करते हुए सात साल बिताए। वे कॉमेडी सर्कस, जस्ट लाफ बाकी माफ़ और कई दूरदर्शन शो जैसे शो में दिखाई दिए हैं|

आप भी पढ़ें उनकी कविताएं (Famous Poetry Of Shambhu Shikhar ) :

सुरेन्द्र शर्मा की हास्य कविताएं

सोने की भयंकर बीमारी  (poems of Shambhu shikhar) 

आजकल हम अपने-आप से त्रस्त हैं
सोने की भयंकर बीमारी से ग्रस्त हैं
ना मौका देखते हैं, न दस्तूर
सोते हैं भरपूर

एक बार सोते-सोते
इतना टाइम पास हो गया
कि लोगों को
हमारे मरने का आभास हो गया।
वो हमें चारपाई समेत श्मशान उठा लाए
गहरी नींद में हम भी कुछ समझ नहीं पाए
जैसे ही
हमें नहलाने के लिए पानी डाला गया
हम नींद से जाग गये
पर लोग हमे भूत समझ कर भाग गये।  (poems of Shambhu shikhar)

बोर्ड की परीक्षा में
प्रश्न पत्र मिलते ही सो गये
आँख तो तब खुली
जब परीक्षा में फेल हो गये।
एक बार मंच पे
कविता पढ़ते-पढ़ते ही सो गये थे
कुछ पता ही नही चला
कब हूट हो गये थे।
सोते सोते ही खाते हैं
सोते सोते ही नहाते हैं
कई बार तो उठने से पहले ही
सो जाते हैं।
शादी वाले दिन
पहले फेरे के बाद ही सो गये।
नींद तब खुली जब दो-दो बच्चे हो गये।

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हमारे पिताजी भी सोने में बड़े तेज थे
एक बार जब रामलीला में उन्हें
कुम्भकरण के रोल में सुलाया गया
फिर तो अगली साल की
रामलीला में ही उठाया गया।
दादाजी सोते सोते ही पैदा हुए
सोते सोते ही मरे थे
उनकी इस प्रतिभा से सब लोग डरे थे।

हम तो वंशवाद निभा रहे हैं
परिवार की सोती परम्परा को
और सुला रहे है।
अब तो बस एक ही तमन्ना है
आयोजक हमें लिफाफे के बदले
दे दे एक चारपाई
साथ में रजाई
हम कविता समाप्त होते ही
मंच पे सो जायेगें
आप को अगली बार बुलाना नही पडेगा
यहीं से उठ कर कविता सुनायेंगे।

मेरे भीतर का कवि… (poems of Shambhu shikhar) 

आँकड़े देख
ठिठक जाती हैं
पुतलियाँ
चीत्कार सुन नहीं पा रहा
बस तस्वीरें ही कान में
शीशा घोल रही है
हर एक ख़बर के साथ
कराह उठता है
मेरे भीतर का कवि ॥
प्यारे बच्चों !
तुम ही नहीं
तुम्हारे साथ
हर पल मर रहीं हैं
मुस्कुराहटें
निच्छल मन
किलकारियाँ
और उम्मीदें  (poems of Shambhu shikhar)

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