रोता हुआ घर छोड़ आया हूं…

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भारत भूषण पंत एक ऐसा नाम है, जिसने भारतीय फिल्म जगत में एक गीतकार के रूप में अपनी पहचान बनाई है। भारत भूषण पंत ने कई गीत लिखे हैं। हालांकि भारत जी के शेर, शायरी और ग़ज़ल आज भी लोगों के दिलों में एक अलग सा एहसास जगा देती है। ऐसी ही उनकी एक ग़ज़ल आज हम आपके लिए लाए हैं।

सिसकते बाम-ओ-दर रोता हुआ घर छोड़ आया हूं,
मैं ख़ुद को एक वीराने में जा कर छोड़ आया हूं

जहाँ एहसास की आवाज़ भी आती नहीं मुझ तक
मैं ऐसी बे-हिसी में ख़ुद को अक्सर छोड़ आया हूं

अकेला मैं ही क्यूँ अब ये सुकूत मौज भी टूटे
थिरकती झील की आँखों में कंकर छोड़ आया हूं

बहुत उजलत में अपने ज़ख़्म मैं ने सी लिए लेकिन
कहीं मैं जिस्म के अंदर ही नश्तर छोड़ आया हूं

जो इक तस्वीर थी दिल में वो मुझ से बन न पाई तो
मैं एक काग़ज़ पे सारे रंग भर कर छोड़ आया हूं…

-भारत भूषण पंत

प्रभात

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