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सुरेन्द्र शर्मा की हास्य कविताएं

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भागदौड़ भरी जिंदगी में यदि कुछ पल के लिए भी खुलकर हंसने का मौका मिल जाए तो शरीर में एक नई ऊर्जा आ जाती है। उसमें भी यदि हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा (Famous Poetry Of Surendra Sharma) को सुनने का मौका मिले तो महफिल में और चार चांद लग जाते हैं।

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तनिक देर कर दी…

नदी में डूबते आदमी ने
पुल पर चलते आदमी को
आवाज लगाई- ‘बचाओ!’
पुल पर चलते आदमी ने
रस्सी नीचे गिराई
और कहा- ‘आओ!’
नीचे वाला आदमी
रस्सी पकड़ नहीं पा रहा था
और रह-रह कर चिल्ला रहा था-
‘मैं मरना नहीं चाहता
बड़ी महंगी ये जिंदगी है
कल ही तो एबीसी कंपनी में
मेरी नौकरी लगी है।’

रस्सी ऊपर खींच ली…

इतना सुनते ही
पुल वाले आदमी ने
रस्सी ऊपर खींच ली
और उसे मरता देख
अपनी आंखें मींच ली
दौड़ता-दौड़ता
एबीसी कंपनी पहुंचा
और हांफते-हांफते बोला-
‘अभी-अभी आपका एक आदमी
डूब के मर गया है
आपकी कंपनी में…एक जगह खाली कर गया है…

इस तरह वो
आपकी कंपनी में
एक जगह खाली कर गया है
ये मेरी डिग्रियां संभालें
बेरोजगार हूं
उसकी जगह मुझे लगा लें।’
ऑफिसर ने हंसते हुए कहा-
‘भाई, तुमने आने में
तनिक देर कर दी

ये जगह तो हमने
अभी दस मिनिट पहले ही
भर दी
और इस जगह पर हमने
उस आदमी को लगाया है
जो उसे धक्का देकर
तुमसे दस मिनिट पहले
यहां आया है।

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वाह, क्या जवाब है ! (Surendra Sharma’s comedy poems)

” संत महात्मा कह गये हैं……

ढोल, गंवार, शुद्र, पशु और नारी ये सब ताड़न के अधिकारी.

इन सभी को पीटना चाहिये!! “

इसका अर्थ समझती हो या समझायें?

पत्नी बोली

“हे स्वामी इसका मतलब तो बिलकुल साफ है

इसमें एक जगह मैं हूँ और चार जगह आप हैं.

राम बनने की प्रेरणा (Surendra Sharma’s comedy poems)

‘पत्नी जी!
मैं छोरा नैं राम बनने की प्रेरणा दे रियो ऊँ
कैसो अच्छो काम कर रियो ऊँ!’
वा बोली-‘मैं जाणूँ हूँ थैं छोरा नैं
राम क्यूँ बणाणा चाहो हो
अइयां दसरथ बणकै तीन घरआली लाणा चाहो हो!’

एक दिन म्हारी घराड़ी बोल्ली –
ऐ जी, पड़ोसी की चौथी घराड़ी मरगी
ते शमशान घाट हो आओ
मैं बोल्यो – मैं को नी जाऊं
मैं ओके घरा तीन बार हो आयो
वो एक बार भी नहीं आयो…

लाचारी और बेबसी को ग़ज़ल बनाने का नाम है राजेश रेड्डी

निन्याणबैं कूण-सी हैं (Surendra Sharma’s comedy poems)

‘पत्नी जी!
मेरो इरादो बिल्कुल ही नेक है
तू सैकड़ा में एक है।’
वा बोली-
‘बेवकूफ मन्ना बणाओ
बाकी निन्याणबैं कूण-सी हैं
या बताओ।’ (Surendra Sharma’s comedy poems)

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