Hindi Poem : देखो प्यारे अल्फाज सुनो, कुछ अनसुलझे जज्बात सुनो

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देखो प्यारे अल्फाज सुनो ,
कुछ अनसुलझे जज्बात सुनो ।
मन की सूनेपन से अपने ,
कुछ यादों के सीप चुनो।
मोती नहीं मिलेंगे इन में ,
पासाड़ समझ फरियाद सुनो ।

मेरी बातों जज्बातों का फर्क नहीं पड़ने वाला,
चंद बूद चुरा लेने से समुद्र नहीं घटने वाला ।।

सूर्य उदित होते ही प्रमुदित पंछी नभ में छाते हैं ,
नई कोपले नई तरंगे मन में हर्ष जगाती हैं ।
सुंदर पुस्पों की खुशबू सारे चमन में होती है ,
नई उत्साह नई उमंगे सबके मन में होती है ।

सृष्टि के आरंभ से यह कभी नहीं थमने वाली,
प्रकृति के सौंदर्य में नित नए प्राण भरने वाली।।

ऐसे ही मेरे जीवन में एक नया सवेरा आया था,
मेरे इस सूखे मन में आकर उसने दीप जलाया था।
चंद ख्वाब ,टूटे सपने , सूनेपन से भरे हुए ,
मैं बुझा बुझा सा रहता दिनभर घोर निराशा भरे हुए।

मुस्कान बिखेरते होठों से नई उम्मीद भरने वाली,
वर्षों से प्यासे चातक में नवीन प्राण भरने वाली ।।

वह स्वप्न सुंदरी लगती थी मैं लल्लू लाल सा लगता था।
वह सुंदरता की मूरत थी मैं एक कबाड़ के जैसा था।

मैं शुद्ध गांव का देसी छोरा इंग्लिश मीडियम पढ़ने वाली,
मै बीच धार में फंसा हुआ वह समुद्र पार करने वाली।

सुर्ख होंठ थे गाल गुलाबी चेहरा रहता था खिला हुआ ,
मैं एक कीचड़ के जैसा था वह पंकज सा था उगा हुआ।
उसके अल्फाज सधे रहते थे मेरी सब पेचे खुली हुई,
मैं मधुशाला पढ़ता रहता वो रोमियो जूलियट में लगी हुई ।

हर शब्द सुलझे रहते उसके नए उत्साह भरने वाली,
हर निराश मन में नित नए ख्वाब भरने वाली ।।

उसके आते ही दिल की धड़कन आप स्वयं रुक जाती थी ,
वो सुंदरता की देवी थी या देवलोक की दर्पण थी।
अत्यंत शांत एकांत चित्त वो निरत साधना में लीन थी,
ओ तेजपुंज थी महादेव की या स्वयं शक्ति अवतार थी ।

उसकी बातें उसकी यादें उसको ही दिल में लिए हुए,
मैं लल्लू लाल सा बैठा रहता एक कोने में पड़े हुए।।

फिर बात चली फिर दोस्त हुए,
दोस्ती की हद तक आ बैठे ।
इस दोस्त दोस्त के चक्कर में ,
खुद का भी चैन गवा बैठे।।

उसकी खुशियां उसकी बातें उसकी यादों में सने हुए,
उसकी ख्वाहिश सब पूरी हो रब से मन्नत में लगे हुए।

फिर हुआ वही जो पहले से ही विधि द्वारा निर्धारित था ,
मेरे सपनों के पंखों का कटना भी बहुत जरूरी था।

नींद नहीं आती थी मुझको रातों को अक्सर रोता था,
उसके ख्वाबों का राजकुंवर उसके सपनों में होता था।
मेरे मन की गहराइयों में घोर अंधेरा होता था ,
मन की उदासी साथ लिए मै निपटअकेला होता था।

चंद ओस की बूंदों से यह प्यास नहीं बुझने वाले,
कुछ टूटे अल्फाजों से जज्बात नहीं मरने वाले।

मैं दिवास्वप्न से जागा तो, सारा घर फैला मिला मुझे,
कुछ ख्वाब अधूरे , टूटे सपने सब कुछ बिखरा मिला मुझे।
गर नीद बड़ी होती तो दिल की सब बातें मैं कह आता,
कुछ फूलों के गुलदस्ते और चॉकलेट भी दे आता।

(साभार – सुनील तिवारी द्वारा लिखित कविता “मेरे अल्फ़ाज़ “)

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-Mradul tripathi

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