कविता : यह धरती कितना देती है…

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छायावाद के प्रमुख कवि कहे जाने वाले सुमित्रानंदन पंत ( Sumitranandan Pant Poems In Hindi) ने सात वर्ष की उम्र में ही कविता लिखना शुरू कर दिया था| उनकी कविताएं प्रकृति के प्रति उनके आकर्षण को भी दर्शाती हैं| महाकवी सुमित्रानंदन पंत का जन्म 20 मई,1900 को उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के कौसानी गांव में हुआ था| वे अपने माता पिता गंगादत्त-पंत की आठवीं संतान थे| पंत के जन्म के छह घंटे बाद ही उनकी मां का निधन हो गया था| इसके बाद उनका लालन पालन उनकी दादी ने ही किया। पंत के बचपन का नाम गोसाई दत्त था लेकिन बाद में उन्होंने अपना नाम बदलकर सुमित्रानंदन पंत रख लिया|

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Sumitranandan Pant Poems In Hindi :

यह धरती कितना देती है

यह धरती कितना देती है! धरती माता

कितना देती है अपने प्यारे पुत्रों को

नही समझ पाया था मैं उसके महत्व को

बचपन में छिः स्वार्थ लोभ वश पैसे बोकर

रत्न प्रसविनी है वसुधा, अब समझ सका हूँ

इसमें सच्ची समता के दाने बोने है

इसमें जन की क्षमता का दाने बोने है

इसमें मानव-ममता के दाने बोने है

जिससे उगल सके फिर धूल सुनहली फसलें

मानवता की, – जीवन श्रम से हँसे दिशाएँ

हम जैसा बोयेंगे वैसा ही पायेंगे

कविराज Maithili Sharan Gupt…

लहरों का गीत

सुन मधुर मरुत मुरली की ध्वनी

गृह-पुलिन नांध, सुख से विह्वल,

हम हुलस नृत्य करतीं हिल हिल

खस खस पडता उर से अंचल!

चिर जन्म-मरण को हँस हँस कर

हम आलिंगन करती पल पल,

फिर फिर असीम से उठ उठ कर

Bharat Bhushan Pant की नज़्में

फिर फिर उसमें हो हो ओझल!

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