क्रांतिकारी कवि ‘पाश’ की कविताएं ज़रूर पढ़ें  

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पंजाब के क्रांतिकारी कवि अवतार सिंह संधू उर्फ ‘पाश’ (Pash Punjabi Poet Best 4 Poems) का जन्म 9 सितंबर 1950 के दिन हुआ था| उनकी कलम से डरे खालिस्तानी उग्रवादियों ने 23 मार्च के दिन उनकी गोली मार कर हत्या कर दी थी| उनकी कविताएं बेहद तल्ख और सार्थक राजनीतिक वक्तव्य हैं|

पढ़ें केदारनाथ सिंह की प्रतिनिधि कविताएं

Pash Punjabi Poet Best 4 Poems : 

सबसे ख़तरनाक (Sabse Khatarnak)

मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती
पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती
ग़द्दारी और लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती
बैठे-बिठाए पकड़े जाना बुरा तो है
सहमी-सी चुप में जकड़े जाना बुरा तो है
सबसे ख़तरनाक नहीं होता
कपट के शोर में सही होते हुए भी दब जाना बुरा तो है
जुगनुओं की लौ में पढ़ना
मुट्ठियां भींचकर बस वक्‍़त निकाल लेना बुरा तो है
सबसे ख़तरनाक नहीं होता

सबसे ख़तरनाक होता है मुर्दा शांति से भर जाना
तड़प का न होना
सब कुछ सहन कर जाना
घर से निकलना काम पर
और काम से लौटकर घर आना
सबसे ख़तरनाक होता है
हमारे सपनों का मर जाना
सबसे ख़तरनाक वो घड़ी होती है
आपकी कलाई पर चलती हुई भी जो
आपकी नज़र में रुकी होती है

सबसे ख़तरनाक वो आंख होती है
जिसकी नज़र दुनिया को मोहब्‍बत से चूमना भूल जाती है
और जो एक घटिया दोहराव के क्रम में खो जाती है
सबसे ख़तरनाक वो गीत होता है
जो मरसिए की तरह पढ़ा जाता है
आतंकित लोगों के दरवाज़ों पर
गुंडों की तरह अकड़ता है
सबसे ख़तरनाक वो चांद होता है
जो हर हत्‍याकांड के बाद
वीरान हुए आंगन में चढ़ता है
लेकिन आपकी आंखों में
मिर्चों की तरह नहीं पड़ता

सबसे ख़तरनाक वो दिशा होती है
जिसमें आत्‍मा का सूरज डूब जाए
और जिसकी मुर्दा धूप का कोई टुकड़ा
आपके जिस्‍म के पूरब में चुभ जाए

मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती
पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती
ग़द्दारी और लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती ।

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बापू की सौगन्ध (Bapu Ki Saugandh)

तुम्हारे रुक-रुक कर जाते पांवों की सौगन्ध बापू
तुम्हें खाने को आते रातों के जाड़ों का हिसाब
मैं लेकर दूँगा
तुम मेरी फ़ीस की चिंता न करना
मैं अब कौटिल्य से शास्त्र लिखने के लिए
विद्यालय नहीं जाया करूँगा
मैं अब मार्शल और स्मिथ से
बहिन बिंदरों की शादी की चिंता की तरह
बढ़ती क़ीमतों का हिसाब पूछने नहीं जाऊँगा
बापू तुम यों ही हड्डियों में चिंता न जमाओं
मैं आज पटवारी के पैमाने से नहीं
पूरी उम्र भत्ता ले जा रही माँ के पैरों की बिवाईयों से
अपने खेत मापूँगा
मैं आज सन्दूक के ख़ाली ही रहे ख़ाने की
भायँ – भायँ से तुम्हारा आज तक का दिया लगान गिनूँगा
तुम्हारे रुक-रुक कर जाते पाँवों की सौगन्ध बापू
मैं आज शमशान-भूमि में जा कर
अपने दादा और दादा के दादा के साथ गुप्त बैठक करूँगा
मैं अपने पुरखों से गुफ़्तगू कर जान लूँगा
यह सब कुछ किस तरह हुआ
कि जब दुकानों जमा दुकानों का जोड़ मंडी बन गया
यह सब कुछ किस तरह हुआ
कि मंडी जमा तहसील का जोड़ शहर बन गया
मैं रहस्य जानूँगा
मंडी और तहसील बाँझ मैदानों में
कैसे उग आया था थाने का पेड़
बापू तुम मेरी फ़ीस की चिंता न करना
मैं कॉलेज के क्लर्कों के सामने
अब रीं-रीं नहीं करूँगा
मैं लेक्चर कम होने की सफ़ाई देने के लिए
अब कभी बेबे या बिंदरों को
झूठा बुखार न चढ़ाया करूँगा
मैं झूठमूठ तुम्हें वृक्ष काटने को गिराकर
तुम्हारी टाँग टूटने जैसा कोई बदशगुन-सा बहाना न करूँगा
मैं अब अंबेडकर के फ़ण्डामेंटल राइट्स
सचमुच के न समझूँगा
मैं तुम्हारे पीले चहरे पर
किसी बेजमीर टाउट की मुस्कराहट जैसे सफ़ेद केशों की
शोकमयी नज़रों को न देख सकूँगा
कभी भी उस संजय गांधी को पकड़ कर
मैं तुम्हारे क़दमो में पटक दूँगा
मैं उसकी ऊटपटाँग बड़को को
तुम्हारें ईश्वर को निकाली ग़ाली के सामने पटक दूँगा
बापू तुम ग़म न करना
मैं उस नौजवान हिप्पी से तुम्हारें सामने पूछूँगा
मेरे बचपन की अगली उम्र का क्रम
द्वापर युग की तरह आगे पीछे किस बदमाश ने किया है
मैं उन्हें बताऊँगा
निःसत्व फ़तवों से चीज़ों को पुराना करते जाना
बेगाने बेटों की माँओं के उलटे सीधे नाम रखने
सिर्फ़फ लोरी के लोरी के संगीत में ही सुरक्षित होता हैं
मैं उससे कहूँगा
ममता की लोरी से ज़रा बाहर तो निकलो
तुम्हें पता चले
बाक़ी का पूरा देश बूढ़ा नहीं है…

चलना है आगे (Chalna Hai Aage)

भगत सिंह ने पहली बार पंजाब को
जंगलीपन, पहलवानी व जहालत से
बुद्धिवाद की ओर मोड़ा था

जिस दिन फाँसी दी गई
उनकी कोठरी में लेनिन की किताब मिली
जिसका एक पन्ना मुड़ा हुआ था
पंजाब की जवानी को
उसके आख़िरी दिन से
इस मुड़े पन्ने से बढ़ना है आगे, चलना है आगे

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संविधान (Savidhan)

संविधान
यह पुस्‍तक मर चुकी है
इसे मत पढ़ो
इसके लफ़्ज़ों में मौत की ठण्‍डक है
और एक-एक पन्‍ना
ज़िन्दगी के अन्तिम पल जैसा भयानक
यह पुस्‍तक जब बनी थी
तो मैं एक पशु था
सोया हुआ पशु
और जब मैं जागा
तो मेरे इन्सान बनने तक
ये पुस्‍तक मर चुकी थी
अब अगर इस पुस्‍तक को पढ़ोगे
तो पशु बन जाओगे
सोए हुए पशु ।

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