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पढ़ें बिहार के प्रसिद्ध कवि की रचनाएं

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आपने महानायक अमिताभ बच्चन का नाम तो सुना है| उनके अभिनय के कई प्रशंसक हैं परन्तु आज हम आपको जिस अमिताभ बच्चन की कविताएं पढ़वाने वाले हैं, वे उनसे अलग हैं| 24 अक्तूबर 1956 को इनका जन्म बिहार के दरभंगा में हुआ था| पढ़ें उनकी कविताएं |

एक देश, एक चुनाव: बिन चुनाव सब सून

मुझे ईर्ष्या है महानायकों से…

मुझे ईर्ष्या है महानायकों से
उनकी तरह मैं मजबूत घोड़ा
ताक़तवर खच्चर नहीं बन सका
जो उतार-चढ़ाव से नहीं घबराते
सारा कूड़ा-करकट
पीठ पर लाद हिनहिनाते भागते
सबकी नैया पार लगाते
टूटते सितारों को कन्धा देते
मुझे दुख है मैं महानायक भी नहीं बना ।

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सारे हिन्दू हिन्दू नहीं होते…

सारे हिन्दू हिन्दू नहीं होते
जो हिन्दू नहीं होते
वे भी हिन्दू होते हैं
क्योंकि वे मुसलमान नहीं होते
लंगोट बाँधने,
राख लपेटने वाले
हिन्दुओं में भी
कुछ कम कुछ ज़्यादा हिन्दू होते हैं
एक खद्दरधारी गांधीवादी
कब खतरनाक हिन्दू में बदल जाए
क्या पता

गरम होता नरम हिन्दू
नरम पड़ता गरम हिन्दू
जनवादी हिन्दू
कम्युनिस्ट हिन्दू
मुक्त हिन्दू उन्मुक्त हिन्दू
जीवन के आख़िरी वक़्त में जगा हिन्दू
अछूत हिन्दू सवर्ण हिन्दू
गँवार हिन्दू सुसंस्कृत हिन्दू
दलितों के हिन्दू बने रहने की अपील करता हिन्दू
भ्रष्ट, अवसरवादी, धर्मनिरपेक्ष हिन्दू
टीक रखने और ठोप लगाने वाला हिन्दू
दिमाग ठण्डा रखने के लिए
माथे पर चन्दन लगाने वाला हिन्दू
भेदिया, प्रचारक, शूटर हिन्दू
संहार करने वाला हिन्दू
संहार देखता हिन्दू
अपने हिन्दू होने पर सुरक्षित महसूस करता हिन्दू
मुस्लिम लड़की के इश्क़ में गिरफ़्तार हिन्दू
उग्र हिन्दुओं से सम्पर्क वाला हिन्दू
जन्म से हिन्दू
सिर्फ़ नाम का हिन्दू
ख़ुद को हिन्दू बताने में शरमाता हिन्दू
झूठा हिन्दू सच्चा हिन्दू
मुसलमानों का डर समझने वाला हिन्दू
मुसलमानों को कसाई समझने वाला हिन्दू
क्या हिन्दुओं की ये अवास्तविक श्रेणियाँ हैं
नहीं, हिन्दू तरह-तरह के होते हैं
और यक़ीन मानिए
उतने ही तरह के मुसलमान भी होते हैं

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मैं बचपन से चोर था…

मैं बचपन से चोर था
चोर ही रहा जीवन भर
जेब से पैसे चुराए
पेड़ से आम नींबू
बहती नाव से तरबूजे
पानी से छोटी मछलियाँ
क़िताबों से कविताएँ

डाकू न बन सका
गिरोह नहीं बनाए
सच्चे कायरों की तरह
आदमी और कवि
दोनों रोए पछताए

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जिन्हें प्रेम नसीब नहीं हुआ…

जिन्हें प्रेम नसीब नहीं हुआ
उन्हें रसायनशास्त्र से प्रेम नहीं हुआ
उनके हाथ लगा रसायनशास्त्र
जैसे जीवशास्त्र पढ़ते हुए
किसी को बैंक किसी को सेना हाथ लगे

उन्हें प्रेम नहीं हुआ
वह स्वयं
एक ज़िम्मेदार, अनुशासित औरत के
हाथ लगे

दोनों को फाटक वाला घर
सुरक्षा की चिन्ता
हाथ लगी

जिस दिन
रसायनशास्त्र खो गया
बचा सिर्फ़ चाबियों का एक बड़ा-सा गुच्छा
कुछ फ़ौलादी ताले
चोरों का डर

उन्हें प्रेम नहीं हुआ
सुरक्षा की सुरक्षा करते हुए
उन्होंने अन्तिम साँस ली

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वे फुदकते रहे
घर के अन्दर
जैसे पिंजरे में तोता

उनके आकाश में
चील-बाजों का आतंक था

वे पूछते कौन
आवाज़ पर यकीन नहीं करते
आदमी के मुँह पर टॉर्च जलाते
कोई ख़तरा न देख
मेहमानों को
घर के अन्दर ले लेते

उन्होंने दो-एक ज़रूरी यात्राएँ की
हालाँकि अजनबियों से फ़ासला बनाकर रखा
किसी का कुछ नहीं चखा
घर से ही पानी ले गए

कभी किसी पर उनका दिल नहीं आया
पर वे मुस्कुराए
हँसे भी
खतरों का सामना करने के लिए
बिना प्रेम के
पचासी साल तक
वे रोटियाँ निगलते और पचाते रहे

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प्रेमियों को
वे पसन्द नहीं कर पाए

प्रेमियों को
उन्होंने बड़े ख़ौफ़नाक तरीके से
नफ़रत करते हुए देखा

बारूद और तूफ़ान से भी ज़्यादा
वे प्रेम से डरते

जिनका मकान नहीं बना
जिन्हें औरत छोड़कर चली गई
जो खुले में हिरण जैसा दौड़ते
जो आवारा घूमते
जिन्होंने शराब से किडनी ख़राब कर ली
जो आधी रात तारों को निहारते
आदमियों का बखान तीर्थस्थल की तरह करते
मौत की तारीख़ याद नहीं रखते
फाटक खुला छोड़कर निकल जाते
उन्हें वे बहुत दूर से
और किसी बड़ी मज़बूरी में ही
हाथ जोड़कर नमस्कार करते

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