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पढ़ें साहिर लुधियानवी की लिखी मक़बूल नज़्में 

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साहिर लुधियानवी (Sahir Ludhianvi) अदब की दुनिया में किसी भी पहचान के मोहताज नहीं हैं| साहिर लुधियानवी (8 मार्च 1921-25 अक्टूबर 1980) प्रसिद्ध शायर तथा गीतकार थे। उनका जन्म लुधियाना में हुआ था और लाहौर तथा बंबई (1949 के बाद) इनकी कर्मभूमि रही। उनका असली नाम अब्दुल हयी है| लुधियाना में जन्म होने के कारण उन्होंने अपना नाम साहिर लुधियानवी रख लिया|

पढ़ें उनकी लिखी मक़बूल नज़्में (Sahir Ludhianvi)

हरिवंशराय ‘बच्चन’ की पांच बेहतरीन कविताएं

ख़याल-ए-ख़ाम है साक़ी

अक़ायद वहम है मज़हब ख़याल-ए-ख़ाम है साक़ी

अज़ल से ज़हन-ए-इन्सां बस्त-ए-औहाम है साक़ी

हक़ीक़त-आशनाई अस्ल में गुम-कदर्ह-राही है
उरूस-ए-आगही परवरदह-ए-अबहाम है साक़ी

मुबारक हो जाईफ़ी को ख़िरद की फ़लसफ़ादानी
जवानी बेनियाज़-ए-इब्रत-ए-अन्जाम है साक़ी

अभी तक रास्ते के पेच-ओ-ख़म से दिल धड़कता है
मेरा ज़ौक़-ए-तलब शायद अभी तक ख़ाम है साक़ी

वहाँ भेजा गया हूँ चाक करने पर्दे-ए-शब को
जहाँ हर सुबह के दामन पे अक्स-ए-शाम है साक़ी

मेरे हमसफ़र उदास न हो

पढ़ें पैरोडी सम्राट पंडित विश्वेश्वर शर्मा के गीत

मेरे नदीम मेरे हमसफ़र उदास न हो

कठिन सही तेरी मन्जिल मगर उदास न हो

कदम कदम पे चट्टानें खडी़ रहें लेकिन
जो चल निकले हैं दरिया तो फिर नहीं रुकते
हवाएँ कितना भी टकराएँ आँधियाँ बनकर
मगर घटाओं के परछम कभी नहीं झुकते
मेरे नदीम मेरे हमसफ़र…

हर एक तलाश के रास्ते में मुश्किलें हैं मगर
हर एक तलाश मुरादों के रंग लाती है
हजारों चाँद सितारों का खून होता है
तब एक सुबह फ़िजाओं पे मुस्कुराती है
मेरे नदीम मेरे हमसफ़र…

जो अपने खून को पानी बना नहीं सकते
वो जिंदगी में नया रंग ला नहीं सकते
जो रास्ते के अँधेरों से हार जाते हैं
वो मंजिलों के उजाले को पा नहीं सकते
मेरे नदीम मेरे हमसफ़र…

मैंने जो गीत…

मैंने जो गीत तिरे प्यार की ख़ातिर लिक्खे
आज उन गीतों को बाज़ार में ले आया हूँ

आज दुक्कान पे नीलाम उठेगा उनका
तूने जिन गीतों पे रक्खी थी मोहब्बत की असास
आज चाँदी के तराज़ू में तुलेगी हर चीज़
मेरे अफ़कार, मिरी शायरी, मिरा एहसास

जो तिरी ज़ात से मंसूबे उन गीतों को
मुफ़लिसी जिन्स बनाने पर उतर आई है
भूक, तेरे रुख़े-रंगों के फ़सानों के इवज़
चंद अशिया -ए- ज़रूरत की तमन्नाई है

देख इस अर्सागहे – मेहनतो – सर्माया में
मेरे नग्मे भी मिरे पास नहीं रह सकते
तेरे जलवे किसी ज़रदार की मीरास सही
तेरे ख़ाके भी मिरे पास नहीं रह सकते

आज उन गीतों को बाज़ार में ले आया हूँ
मैंने जो गीत तिरे प्यार की ख़ातिर लिक्खे

अभी न जाओ छोड़ कर…

Hasya Kavita Of Hullad Muradabadi : हुल्लड़ मुरादाबादी की ‘हुल्लड़ मचाती कविताएं

अभी न जाओ छोड़ कर के दिल अभी भरा नहीं
अभी अभी तो आई हो अभी अभी तो
अभी अभी तो आई हो, बहार बनके छाई हो
हवा ज़रा महक तो ले, नज़र ज़रा बहक तो ले
ये शाम ढल तो ले ज़रा ये दिल सम्भल तो ले ज़रा
मैं थोड़ी देर जी तो लूँ, नशे के घूँट पी तो लूँ
नशे के घूँट पी तो लूँ
अभी तो कुछ कहाँअहीं, अभी तो कुछ सुना नहीं
अभी न जाओ छोड़कर के दिल अभी भरा नहीं

सितारे झिलमिला उठे, सितारे झिलमिला उठे, चराग़ जगमगा उठे
बस अब न मुझको टोकना
बस अब न मुझको टोकना, न बढ़के राह रोकना
अगर मैं रुक गई अभी तो जा न पाऊँगी कभी
यही कहोगे तुम सदा के दिल अभी नहीं भरा
जो खत्म हो किसी जगह ये ऐसा सिलसिला नहीं
अभी नहीं अभी नहीं
नहीं नहीं नहीं नहीं
अभी न जाओ छोड़कर के दिल अभी भरा नहीं

अधूरी आस, अधूरी आस छोड़के, अधूरी प्यास छोड़के
जो रोज़ यूँही जाओगी तो किस तरह निभाओगी
कि ज़िंदगी की राह में, जवाँ दिलों की चाह में
कई मुक़ाम आएंगे जो हम को आज़माएंगे
बुरा न मानो बात का ये प्यार है गिला नहीं
हाँ, यही कहोगे तुम सदा के दिल अभी नहीं भरा
हाँ, दिल अभी भरा नहीं
नहीं नहीं नहीं नहीं

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