पढ़ें पैरोडी सम्राट पंडित विश्वेश्वर शर्मा के गीत

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उदयपुर के एक साधारण ब्राह्मण परिवार में 5 सितम्बर सन 1933 को पंडित विश्वेश्वर शर्मा (Pandit Vishweshwar Sharma) का जन्म हुआ था | कविता और गीत का लेखन पंडित जी बाल्यावस्था से ही करने लग गए थे| पंडितजी ने लगातार चालीस वर्षो तक मंच पर कविता पाठ किया| उन्होंने फिल्मों में भी कई गीत लिखे| एक समय ऐसा भी आया जब श्रोताओ का रुझान कविता और गीतों की तरफ से कम हो गया, तब उन्होंने मंचों पर प्रतिगीत यानी पैरोडी सुनाना शुरू किया और देखते ही देखते वो पैरोडी सम्राट (Pandit Vishweshwar Sharma) के तोर पर प्रतिष्ठित हो गए | लेखन में योगदान के लिए फिल्म जगत एवं श्रोताओं के ह्रदय में हमेशा जीवित रहेंगे|  पढ़ें उनके लिखे गीत|

लालच बुरी बला

चल संन्यासी मंदिर में… (Pandit Vishweshwar Sharma)

चल सन्यासी मंदिर में, तेरा चिमटा मेरी चूड़ियाँ
दोनों साथ बजाएंगे, साथ-साथ खनकाएंगे
क्यूँ हम जायें मंदिर में, पाप है तेरे अंदर में
लेकर माला कंठ दुशाला राम नाम गुन गायेंगे
रेशम सा ये रूप सलोना यौवन है या तपता सोना
ये तेरी मोहन सी सूरत कर गई मुझपे हाए जादू-टोना
कैसा जादू-टोना, सारी मन की ये माया है
तुम पे देवी किसी रोग की पड़ी विकट छाया है
चल सन्यासी मंदिर में, तेरा कमंडल मेरी गगरिया
साथ-साथ छलकायेंगे, क्यूँ हम जायें मंदिर में
पाप है तेरे अंदर में
हम तो जोगी राम के रोगी धूनी अलग रमाएंगे
जागे-जागे सो जाती हूँ और सपनों में खो जाती हूँ
तब तू मेरा हो जाता है और पिया मैं तेरी हो जाती हूँ
सपनों में भरमाकर मानव सच्चा सुख खोता है
अरे, राम नाम जपते रहने से कष्ट दूर होता है
चल सन्यासी मंदिर में, तेरा चोला मेरी चुनरिया
साथ-साथ रंगवायेंगे, क्यों हम जायें मंदिर में
पाप है तेरे अंदर में…

Hasya Kavita Of Hullad Muradabadi : हुल्लड़ मुरादाबादी की ‘हुल्लड़ मचाती कविताएं

छोड़ झमेले बैठ अकेले जीवन सफल बनायेंगे
मन से मन का दीप जला ले मधुर मिलन की ज्योती जगा ले
पूरण कर दे मेरी आशा आज मुझे अपना ले अपना ले
मन से मन का दीप जलाना मुझे नहीं आता है
बस पूजा की ज्योत जलाना मुझे यही भाता है
चल सन्यासी मंदिर में, मेरा रूप और तेरी जवानी
मिलकर ज्योती जलायेंगे, क्यों हम जायें मंदिर में
पाप है तेरे अंदर में…

धर्म छोड़कर, ध्यान छोड़कर पाप नहीं अपनाएंगे
प्रेम है पूजा प्रेम है पूजन प्रेम जगत है प्रेम ही जीवन
मत कर तू अपमान प्रेम का
प्रेम है नाम प्रभू का बड़ा ही पावन
प्रेम-प्रेम कर के मुझको कर देगी अब तू पागल
मेरा धीरज डोल रहा है, लाज रखे गंगा जल
चल सन्यासी मंदिर में, तेरी माला, मेरा गजरा
गंगा साथ नहायेंगे… (Pandit Vishweshwar Sharma)

तुम्हारे बिन गुज़ारे है कई दिन (Pandit Vishweshwar Sharma)

तुम्हारे बिन गुज़ारे है कई दिन
अब न गुज़रेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे है कई दिन
अब न गुज़रेंगे
जो दिल में आ गयी है आज
हम वो कर ही गुज़रेंगे

ख़बर क्या थी कि
अपने भी सितारे
ऐसे बिगड़ेंगे
ख़बर क्या थी कि
अपने भी सितारे
ऐसे बिगड़ेंगे
कि जो पूजा के काबिल है
वो यूँ बदलेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे है कई दिन
अब न गुज़रेंगे…

तुम्हारी इक न मानेंगे
करेंगे आज मन मानी
बहुत तरसाया है तुमने
नहीं अब और तरसेंगे
सताया तो नहीं करते
कभी किस्मत के मारों को
किसी की जान जायेगी
किसी के अरमान निकालेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे है कई दिन
अब न गुज़रेंगे…

जो दिल में आ गयी है आज
हम वो कर ही गुज़रेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे है कई दिन
अब न गुज़रेंगे…

मुनव्वर राणा : बेखौफ और बेलाग अंदाज़

मनाया तुमको कितनी बार
लेकिन तुम नहीं माने
तो अब मजबूर होकर हम
शरारत पर भी उतरेंगे
हक़ीक़त क्या है
ये पहले बता देते तो अच्छा था
खुद अपने जाल से भी हम न जाने कैसे निकलेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे है कई दिन
अब न गुज़रेंगे…

कई दिन बाद फिर ये साज़
ये सिंगार पाया है
नहीं मालूम था कि आप यूँ
इंकार कर देंगे
तुम्हें कैसे बताये
क्या हमारे साथ गुज़री है
तुम्हारे ख़्वाब टूटेंगे
अगर सच बात कह दें
तुम्हारे बिन गुज़ारे है कई दिन
अब न गुज़रेंगे…

जो दिल में आ गयी है आज
हम वो कर ही गुज़रेंगे
तुम्हारे बिन गुज़ारे है कई दिन
अब न गुज़रेंगे (Pandit Vishweshwar Sharma)

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