website counter widget

Hasrat Jaipuri को और सुनने की हसरत रह गई

0

जयपुर में 15 अप्रैल, 1918 को जन्मे इकबाल हुसैन उर्फ़ हसरत जयपुरी (Hasrat Jaipuri Best Gazals) को शायरी विरासत में मिली थी| उनके नाना फ़िदा हुसैन फ़िदा मशहूर शायर थे| गुरबत के दिनों में मुंबई आने के किराए से लेकर जूते-चप्पल और कपड़ों तक की व्यवस्था की थी| और इस अहसान को उन्होंने एक फ़िल्मी सिचुएशन में ही सही, पर क्या खूब अदा किया -‘अहसान मेरे दिल पे तुम्हारा है दोस्तो’ |

व्यवस्था पर कटाक्ष करती Adam Gondvi की कविता

आप भी पढ़ें उनकी बेमिसाल गज़लें (Hasrat Jaipuri Best Gazals)  :

चल मेरे साथ ही चल… (Hasrat Jaipuri) 

चल मेरे साथ ही चल ऐ मेरी जान-ए-ग़ज़ल
इन समाजों के बनाये हुये बंधन से निकल, चल

हम वहाँ जाये जहाँ प्यार पे पहरे न लगें
दिल की दौलत पे जहाँ कोई लुटेरे न लगें
कब है बदला ये ज़माना, तू ज़माने को बदल, चल

प्यार सच्चा हो तो राहें भी निकल आती हैं
बिजलियाँ अर्श से ख़ुद रास्ता दिखलाती हैं
तू भी बिजली की तरह ग़म के अँधेरों से निकल, चल

अपने मिलने पे जहाँ कोई भी उँगली न उठे
अपनी चाहत पे जहाँ कोई दुश्मन न हँसे
छेड़ दे प्यार से तू साज़-ए-मोहब्बत-ए-ग़ज़ल, चल

पीछे मत देख न शामिल हो गुनाहगारों में
सामने देख कि मंज़िल है तेरी तारों में
बात बनती है अगर दिल में इरादे हों अटल, चल

इसीलिए तो वो रुख़ पे नक़ाब रखते हैं  (Hasrat Jaipuri) 

पढ़ें Mahavir Prasad Dwivedi की कविताएं 

वो अपने चेहरे में सौ आफ़ताब रखते हैं
इसीलिये तो वो रुख़ पे नक़ाब रखते हैं

वो पास बैठें तो आती है दिलरुबा ख़ुश्बू
वो अपने होठों पे खिलते गुलाब रखते हैं

हर एक वर्क़ में तुम ही तुम हो जान-ए-महबूबी
हम अपने दिल की कुछ ऐसी किताब रखते हैं

जहान-ए-इश्क़ में सोहनी कहीं दिखाई दे
हम अपनी आँख में कितने चेनाब रखते हैं

आग लगाने के लिये आ (Hasrat Jaipuri) 

शोले ही सही आग लगाने के लिये आ
फिर तूर के मंज़र को दिखाने के लिये आ

ये किस ने कहा है मेरी तक़दीर बना दे
आ अपने ही हाथों से मिटाने के लिये आ

ऐ दोस्त मुझे गर्दिश-ए-हालात ने घेरा
तू ज़ुल्फ़ की कमली में छुपाने के लिये आ

दीवार है दुनिया इसे राहों से हटा दे
हर रस्म मुहब्बत की मिटाने के लिये आ

मतलब तेरी आमद से है दरमाँ से नहीं
“हसरत” की क़सम दिल ही दुखाने के लिये आ

Nida Fazli की दिलकश गज़लें

एहसान मेरे दिल पे तुम्हारा है दोस्तों (Hasrat Jaipuri) 

एहसान मेरे दिल पे तुम्हारा है दोस्तों
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों

बनता है मेरा काम तुम्हारे ही काम से
होता है मेरा नाम तुम्हारे ही नाम से
तुम जैसे मेहरबां का सहारा है दोस्तों
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों

जब आ पडा है कोई भी मुश्किल का रास्ता
मैंने दिया है तुम को मुहब्बत का वास्ता
हर हाल में तुम्हीं को पुकारा है दोस्तों
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों

यारों ने मेरे वास्ते क्या कुछ नहीं किया
सौ बार शुक्रिया अरे सौ बार शुक्रिया
बचपन तुम्हारे साथ गुज़ारा है दोस्तो
ये दिल तुम्हारे प्यार का मारा है दोस्तों (Hasrat Jaipuri)

ट्रेंडिंग न्यूज़
Share.