पुरुषोत्तम अब्बी ‘आज़र’ की दिल को छू लेने वाली कविताएं

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Best Poetry Of Purshottam Abi Azar :

अगर तुम वही हो जो तस्वीर में हो
समझ लो लिखी मेरी तक्दीर में हो

सभी सांस लें हम यूं खुल के हवा में
मुक्द्दर किसी का न जंजीर में हो

लिखा मैंने खत हैं क्यूं उत्तर न आया
जरुरी नहीं उसकी तहरीर में हो

न पूछा किसी ने भी जिन्दे को पानी
बना मक्बरा उसकी तौकीर में हो

ये रौशन अगर थोड़ी दुनिया है”आज़र”
तुझे क्या पता तेरी तन्वीर में हो

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Bharat Bhushan Pant की नज़्में

किसको फुर्सत है दुनिया में कौन बुलाने आएगा

किसको फुर्सत है दुनिया में कौन बुलाने आएगा
बात -बात पे रुठोगे तो कौन मनाने आएगा

जब भी मैं आवाज़ हूँ देता आनाकानी करते हो
मेरे बाद बता दो तुमको कौन बुलाने आएगा

गंगा जी को माँ कहते सब जल भी गंदा करते हैं
पाप धुलेंगे कैसे यारो कौन नहाने आएगा

इस बस्ती को छोड़ चला मैं तू जाने और तेरा काम
सांकल तेरे दरवाज़े की कौन बजाने आएगा

इन अंधियारी गलियों को इक मैं ही रौशन करता था
दिन ढलते ही दीपक “आज़र” कौन जलाने आएगा

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कवियों के कवि मैथलीशरण गुप्तजी

समझेगा कौन हमको इतना ज़रा बता दो

समझेगा कौन हमको इतना ज़रा बता दो
किस बात पे हैरां हो इतना ज़रा बता दो

देखा है जब से तुमको दिल तुम पे आ गया है
जाएं तो किस जहां को इतना ज़रा बता दो

हमसे ख़फ़ा न होंगे वादा किया था तुमने
ख़ामोश क्यूं हुए हो इतना ज़रा बता दो

कहना है जितना आसां मुश्किल है क्य़ूं निभाना
हम पूछते हैं तुमको इतना ज़रा बता दो

ख़ामोश हैं निगाहें गुमसुम सी क्यूं तुम्हारी
“आज़र” ज़रा सा ठहरो, इतना ज़रा बता दो

सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला की शानदार कविताएं

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