मुस्कान बिखेरती ओम व्यास ‘ओम’ की कविताएं

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तिलक, चोटी, रूद्राक्ष और चश्मा धारण किए सभी श्रोताओं पर एक अलग ही प्रभाव छोड़ने वाले ओम व्यास (Om Vyas Hasya Kavita In Hindi) ‘ओम’ की काव्य शैली सबसे अलग थी | 7 जुलाई 2009 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में हास्य-जगत का रोशन सितारा डूब गया। उनकी पिता और माता पर लिखी कविता उनके प्रशंसकों को आज भी उनकी याद दिलाता है| पिता और माता पर लिखी कविता तो सब ने सुनी है, परन्तु आज हम आपको उनकी हास्य कविताएं सुनाएंगे |

काका हाथरसी की कविताएं पढ़ आप हो जाओगे लोटपोट

Om Vyas Hasya Kavita In Hindi :

मज़ा ही कुछ और है 

दांतों से नाखून काटने का
छोटों को जबरदस्ती डांटने का
पैसे वालों को गाली बकने का
मूंगफली के ठेले से मूंगफली चखने का
कुर्सी पे बैठ कर कान में पैन डालने का
और डीटीसी की बस की सीट में से स्पंज निकालने का
मज़ा ही कुछ और है

एक ही खूंटी पर ढेर सारे कपड़े टांगने का
नये साल पर दुकानदार से कलैंडर मांगने का
चलती ट्रेन पर चढ़ने का
दूसरे की चिट्ठी पढ़ने का
मांगे हुए स्कूटर को तेज भगाने का
और नींद न आने पर पत्नी को जगाने का
मज़ा ही कुछ और है

चोरी से फल फूल तोड़ने का
खराब ट्यूब लाइट और मटके फोड़ने का
पड़ोसिन को घूर घूर कर देखने का
अपना कचरा दूसरों के घर के सामने फेंकने का
बथरूम में बेसुरा गाने का
और थूक से टिकट चिपकाने का
मज़ा ही कुछ और है

आफिस से देर से आने का
फाइल को जबरदस्ती दबाने का
चाट वाले से फोकट में चटनी डलवाने का
बारात में प्रैस किये हुए कपड़ों को फिर से प्रैस करवाने का
ससुराल में साले से पान मंगवाने का
और साली की पीठ पर धौल जमाने का
मज़ा ही कुछ और है

पंगत में एक सब्जी के लिये दो दौने लगाने का
अपना सबसे फटा नोट आरती में चढ़ाने का
दूसरों के मोबाइल से चिपकने का
पान और गुटके को इधर उधर पिचकने का
कमजोर से बेमतलब लड़ने का
और पत्नी को रोज रोज परेशान करने का
मज़ा ही कुछ और है

हर लफ्ज के साथ मोहब्बत की नई शुरुआत

पति-पत्नी शीर्षक से लिखी कविता की चंद पंक्तियां देखिए

पत्नी जब देना बैंक होती है
पति बेचारा को-ऑपरेटिव बैंक हो जाता है
पत्नी पति की ज़िन्दगी में भारतीय जीवन बीमा
निगम बन कर आती है
और पति की ज़िन्दगी
ओरिएण्टल फ़ायर एंड जनरल इंश्योरेंस हो जाती है

आमपाक और मैसूर पाक नाम की मिठाइयों की तरह राजनीति पाक नाम के व्यंजन की रैसिपी ओम व्यासजी कुछ यूं सुझाते थे |

सामग्री

धुली हुई बेईमानी 420 ग्राम
खड़ी ग़ुंडागर्दी 840 ग्राम
कुटा हुआ अवसरवाद 420 ग्राम
भ्रष्टाचार आवश्यकतानुसार
चंदा स्वादानुसार
और थोड़ी सी सेवा सजावट के लिए..

बात बन आई है फिर से….

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