ज़रूरी बात कहनी हो, कोई वादा निभाना हो

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हमेशा देर कर देता हूं   (Munir Niazi Famous Ghazal)
हमेशा देर कर देता हूं मैं हर काम करने में
ज़रूरी बात कहनी हो, कोई वा’दा निभाना हो
उसे आवाज़ देनी हो, उसे वापस बुलाना हो
हमेशा देर कर देता हूं मैं

मदद करनी हो उस की यार की ढांढस बंधाना हो (Munir Niazi Famous Ghazal)
बहुत देरीना रस्तों पर किसी से मिलने जाना हो
हमेशा देर कर देता हूं मैं

बदलते मौसमों की सैर में दिल को लगाना हो
किसी को याद रखना हो, किसी को भूल जाना हो
हमेशा देर कर देता हूं मैं

किसी को मौत से पहले किसी ग़म से बचाना हो (Munir Niazi Famous Ghazal)
हक़ीक़त और थी कुछ उस को जा के ये बताना हो
हमेशा देर कर देता हूं मैं हर काम करने में…..

(साभार:शायर मुनीर नियाजी द्वारा लिखित कविता “हमेशा देर कर देता हूं”)

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