एक आकाश पहाड़ की चोटी पर एक गड्ढे में

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पहले एक चांद जरूरी है

एक आकाश पहाड़ की चोटी पर
एक गड्ढे में
आकाश दोनों हैं
फर्क चांद सितारों का है

(leeladhar jagudi hindi poem)

Hindi Poem : एक किताब है ज़िन्दगी बनते बिगड़ते हालातों का हिसाब है जिंदगी

पहली बार यहां तलैया थी
दो चांद दिखे थे
प्लेट और परात में भी
दिख सकता है चांद
अगर पानी हो
पानी हो और चांद न हो तो?

चांद दो भी हो सकते हैं और दस भी
पर अनुभव के आकाश में
पहले एक चांद जरूरी है
तभी दिखेगा कोई चांद
अनुभव के पाताल में भी

(leeladhar jagudi hindi poem)

Hindi Poem : ख़ुद को आख़िर इतना मजबूर क्यूँ होने दें

कहीं एक चांद ज़रूरी है
चार चांद लगाने के लिए

क्योंकि जो छोटा हो और बड़ा हो जाए
बड़ा हो जाने पर भी छोटा हो जाए
जो होते हुए भी गायब रह सके
और गायब रहकर भी चमक जाए
अनुभव के पाताल के लिए भी
अनुभव के आकाश में
पहले एक चांद ज़रूरी है।

(leeladhar jagudi hindi poem)

कई बार

एक जीना जग जाहिर
एक जीना चुपचाप
दो-दो प्रकार से जीना पड़ता है एक जीवन
कई बार

अकस्मात एक दिन खत्म होने से पहले
अंजुली भर पानी में
सिकुड़ते आकाश की तड़प की तरह
जीना और समाना पड़ता है कई बार
रिसना पड़ता है उड़ जाना पड़ता है
छीजना पड़ता है कई बार

मिट्टी के गुण का शिकार
हवा के गुण का शिकार
पानी के गुण का शिकार
जीवन में जीवन का शिकार होना पड़ता है

(साभार: प्रसिद्ध कवि ‘लीलाधर जगूड़ी’ की श्रेष्ठ 2 कविताएं)

(leeladhar jagudi hindi poem)

Hindi Poem : छिप-छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ बहाने वालों

-Mradul tripathi

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