Kumar Vishwas Best Poetry : प्रेम की कविताएं

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कोई दिवाना कहता हैं

कोई दिवाना कहता हैं, कोई पागल समझाता हैं,
मगर धरती की बैचेनी को, बस बादल समझता हैं,
मैं तुझसे दूर कैसा हु, तू मुझसे दूर कैसी हैं,
ये तेरा दिल समझता हैं, या मेरा दिल समझता है।

मुहब्बत एक एहसासों की, पावन सी कहानी है,
कभी कबीरा दिवाना था, कभी मीरा दिवानी हैं,
यहाँ सब लोग कहतें हैं, मेरी आँखों में आंसू हैं,
जो तू समझें तो मोती हैं, ना समझें तो पानी हैं।

समंदर पीर का अंदर हैं, लेकिन रो नहीं सकता,
ये आंसू प्यार का मोती हैं, इसको खो नहीं सकता,
मेरी चाहत को अपना तू बना लेना, मगर सुन ले,
जो मेरा हो नहीं पाया, वो तेरा हो नहीं सकता।

की ब्रह्मर कोई कुमुदनी पर, मचल बैठा तो हंगामा,
हमारे दिल में कोई ख़्वाब पर बैठा तो हंगामा,
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्से मौहब्बत के,
मैं किस्से को हक़ीकत मैं बादल बैठा तो हंगामा।

डॉ. कुमार विश्वास

 

हमारा दिल जुड़ा है

एक प्यार का पन्ना लिखने बैठे थे आपके लिये।
लिख दी एक पूरी क़िताब ,क्योकि
आप वो पन्ना हैं जिसने हमें ज़िन्दगी की राह पर हर क़दम पर साथ दिया है।
आप वो पन्ना है।
जिसको एक बार कोई इंसान देख ले तो जैसे नशे में नाच उठता है।
आप वो पन्ना है।
जो हमारे हर सास में जैसे बस्ती हैं।
आप वो पन्ना है।
जो कोयल जैसे सबको अपनी आवाज़ से जगलेते हैं।
आप वो पन्ना है।
जो प्यार से नहीं महोब्बत से लिखा है।
आप वो पन्ना है।
जो जैसे शाह जहा और मुमताज़ की अमर दस्ता की हकदार है।
और आप वो पन्ना है।
जिसके दिल से हमारा दिल जुड़ा है।

 

मुझे अपना प्यार बना लो

मुझें अपनी जान बना लो।
अपना अहसास बना लो।।
सीने से लगा लो आज।
मुझे अपनी रात बना लो आज।।
मुझे अपना अल्फाज़ बना लो।
अपने दिल की आवाज़ बना लो।।
बसा लो अपनी आँखों में।
मुझे अपना ख़्वाब बना लो।।
मुझे छुपा लो सारी दुनिया से।
अपने एक गहरा राज बना लो।।
आज बन जाओ मेरी मोहब्बत।
ओर मुझे अपना प्यार बना लो।।

नारी का दर्द बयां करती कविता

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