हिंदी कविता – बिटिया

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देश मे बेटी के पंखों को ना तोड़ा जाए
कोख में सांसे भरने से ना रोका जाए
जो वो चले तो हवा भी बहे महफूज़ यहाँ
अब कोई दामिनी को फिर से ना कुचला जाए

बेटियां घर की हंसी घर की खिलखिलाहट है
ये तो बस जिंदगी में खुशियों की इक आहट है
ज़रा सा हाथ बढ़ा दो इन्हें भरोसे का
देखो फिर सपनो में ये हौसलो की राहत है

बेटियां आँगनों की चिड़िया है गौरैया सी
घर की क्यारी में रखे मुस्कुराते फूलों सी
बेटियां है तो रौशन है सवेरा कल का
नन्ही आंखों में भरी सपनो की अंगडाई सी

आओ मिलकर करे आज ये वादा खुद से
अब कभी बेटी को हम उड़ने से ना रोकेंगे
जो ना जकड़ेंगे कभी बढ़ते हुए कदम इनके
हर घर मे सिंधु साक्षी कल्पना को देखेंगे

रचनाकार – श्रीमती मोनिका महेश भट्ट (हैदराबाद )

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