website counter widget

Hindi Poetry : सफ़र की आख़िरी मंज़िल के राहबर हम हैं…

0

Best Poems Of Shabnam Shakeel :

1
तन्हा खड़े हैं हम सर-ए-बाज़ार क्या करें,
कोई नहीं है ग़म का ख़रीदार क्या करें

ऐ कम-नसीब दिल तू मगर चाहता है क्या,
सन्यास ले लें छोड़ दें घर-बार क्या करें

उलझा के ख़ुद ही ज़ीस्त के इक-इक तार को,
ख़ुद से सवाल करते हैं हर बार क्या करें

इक उम्र तक जो ज़ीस्त का हासिल बनी रहीं,
पामाल हो रही हैं वो अक़दार क्या करें

है पूरी कायनात का चेहरा धुआँ-धुआँ,
ग़ज़लों में ज़िक्र-ए-यार तरह-दार क्या करें

इस दोहरी ज़िंदगी में भी लाखों अज़ाब हैं,
दुनिया से दिल है बरसर-ए-पैकार क्या करें

2
सफ़र की आख़िरी मंज़िल के राहबर हम हैं,
हमारे साथ चलो गर्द-ए-रहगुज़र हम हैं

लिखी हैं चेहरों पे जो सुर्ख़ियाँ पढ़ो उन को,
ख़बर हो आम कि दुनिया से बा-ख़बर हम हैं

अकेला-पन हमें महसूस कब हुआ अब तक,
कि दश्त-दश्त हैं लेकिन नगर-नगर हम हैं

घनेरे साए न ढूढों यहीं पे दम लो ज़रा,
कि जिस की छाँव में ठंडक है वो शजर हम हैं

समुंदरों से कहो वो सिमट के आ जाएँ,
कि इस जहाँ में अकेले ही कूज़ा-गर हम हैं

वो ख़ूब शख़्स है, देखा है मिल के हम ने उसे,
मगर है ये भी हक़ीक़त कि ख़ूब-तर हम हैं…

3
वहां भी ज़हर-जुबां काम कर गया होगा,
कि आदमी था वो, बातों से डर गया होगा

थी मैं भी उस पे हंसी, मिल के इस जहां के साथ,
ये सुन के शर्म से शायद वो मर गया होगा

हज़ार बार सुना फिर भी दिल नहीं माना ,
कि मेरे प्यार से दिल उस का भर गया होगा

नए मकीन हैं अब वाँ उसे ख़बर कब थी,
बड़े ख़ुलूस से वो मेरे घर गया होगा

कोई दरीचा खुला रह गया था आँधी में,
मेरा वजूद यक़ीनन बिखर गया होगा

वो जानता तो है महफ़िल के भी सभी आदाब,
जो देख कर नहीं उठा तो डर गया होगा

न हो जो सतह पे हलचल तो इस से ये न समझ,
चढ़ा हुआ था जो दरिया उतर गया होगा…

– शबनम शकील

Maithili Sharan Gupt Poetry : हम कौन थे, क्या हो गये हैं, और क्या होंगे अभी

Happy Birthday Gulzar : गुलज़ार की 5 बेहतरीन कविताएं!

Best Poems Of Faiz Ahmad Faiz : हर क़दम हम ने आशिक़ी की है…

ट्रेंडिंग न्यूज़
Share.