Best Poems Of Faiz Ahmad Faiz : हर क़दम हम ने आशिक़ी की है…

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फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ (Best Poems Of Faiz Ahmad Faiz) उर्दू मुशायरों का एक जाना-माना नाम है। फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की ग़ज़लें आज भी लोगों के दिलों में प्यार का चिराग रोशन कर देते हैं। फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ को उर्दू मुशायरों की जान कहा जाता है। उनके बिना कोई भी मुशायरा मुकम्मल नहीं होता था।

Hindi Kahani : प्राकृतिक सुंदरता से ज्यादा सुंदर कुछ नहीं

1

शाख़ पर ख़ून-ए-गुल रवां है वही
शोख़ी-ए-रंग-ए-गुलिस्तां है वही

सर वही है तो आस्तां है वही
जाँ वही है तो जान-ए-जाँ है वही

अब जहां मेहरबां नहीं कोई
कूचा-ए-यार मेहरबां है वही

बर्क़ सौ बार गिर के ख़ाक हुई
रौनक़-ए-ख़ाक-ए-आशियां है वही

आज की शब विसाल की शब है
दिल से हर रोज़ दास्तां है वही

चांद तारे इधर नहीं आते
वर्ना ज़िंदा में आसमां है वही

2

फिर आईना-ए-आलम शायद कि निखर जाए
फिर अपनी नज़र शायद ता-हद्द-ए-नज़र जाए

सहरा पे लगे पहरे और क़ुफ़्ल पड़े बन पर
अब शहर-बदर हो कर दीवाना किधर जाए

ख़ाक-ए-रह-ए-जानां पर कुछ ख़ूँ था गिरा अपना
इस फ़स्ल में मुमकिन है ये क़र्ज़ उतर जाए

देख आएं चलो हम भी जिस बज़्म में सुनते हैं
जो ख़ंदा-ब-लब आए वो ख़ाक-बसर जाए

या ख़ौफ़ से दर-गुज़रें या जां से गुज़र जाएं
मरना है कि जीना है इक बात ठहर जाए…

Hindi Kahani : गहरी दोस्ती और लालच

3

सहल यूँ राह-ए-ज़िंदगी की है
हर क़दम हम ने आशिक़ी की है

हम ने दिल में सजा लिए गुलशन
जब बहारों ने बे-रुख़ी की है

ज़हर से धो लिए हैं होंट अपने
लुत्फ़-ए-साक़ी ने जब कमी की है

तेरे कूचे में बादशाही की
जब से निकले गदागरी की है

बस वही सुर्ख़-रू हुआ जिस ने
बहर-ए-ख़ूँ में शनावरी की है

जो गुज़रते थे ‘दाग़’ पर सदमे
अब वही कैफ़ियत सभी की है

Hindi Kahani : पहले खुद जांचों, परखो उसके बाद यक़ीन करो

4

इज्ज़-ए-अहल-ए-सितम की बात करो
इश्क़ के दम-क़दम की बात करो

बज़्म-ए-अहल-ए-तरब को शरमाओ
बज़्म-ए-असहाब-ए-ग़म की बात करो

बज़्म-ए-सर्वत के ख़ुश-नशीनों से
अज़मत-ए-चश्म-ए-नम की बात करो

है वही बात यूँ भी और यूँ भी
तुम सितम या करम की बात करो

ख़ैर हैं अहल-ए-दैर जैसे हैं
आप अहल-ए-हरम की बात करो

हिज्र की शब तो कट ही जाएगी
रोज़-ए-वस्ल-ए-सनम की बात करो

जान जाएँगे जानने वाले
‘फ़ैज़’ फ़रहाद ओ जम की बात कर

– फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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