Tahir Faraz Best Poetry : जिस ने तेरी याद में सजदे किए थे ख़ाक पर…

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‘ताहिर फ़राज़’ उर्दू मुशायरों का एक बेहद ही जाना-माना नाम है। ताहिर फ़राज़ की हर नज़्म सीधे दिल पर अपना असर छोड़ती है। उनकी ग़ज़लों के एक-एक लफ्ज़ बेहद असर रखते हैं। तो चलिए आपको सुनाते हैं उनकी कुछ चुनिंदा ग़ज़लें।

Hindi Kahani : पेड़ का इनकार

1

अब के बरस होंटों से मेरे तिश्ना-लबी भी ख़त्म हुई
तुझ से मिलने की ऐ दरिया मजबूरी भी ख़त्म हुई,

कैसा प्यार, कहां की उल्फ़त, इश्क़ की बात तो जाने दो
मेरे लिए अब उस के दिल से हमदर्दी भी ख़त्म हुई,

सामने वाली बिल्डिंग में अब काम है बस आराइश का
कल तक जो मिलती थी हमें वो मज़दूरी भी ख़त्म हुई,

जेल से वापस आ कर उस ने पांचों वक़्त नमाज़ पढ़ी
मुंह भी बंद हुए सब के और बदनामी भी ख़त्म हुई,

जिस की जल-धारा से बस्ती वाले जीवन पाते थे,
रस्ता बदलते ही नदी के वो बस्ती भी ख़त्म हुई

Hindi Kahani : सच बोलने की हिम्मत

2

जिस ने तेरी याद में सजदे किए थे ख़ाक पर
उस के क़दमों के निशाँ पाए गए अख़लाक़ पर

वाकिया ये कुन-फकां से भी बहुत पहले का है
इक बशर का नूर था क़िंदील में अख़लाक़ पर

दोस्तों की महफ़िलों से दूर हम होते गए
जैसे-जैसे सिलवटें पड़ती गईं पोशाक पर

मख़मली होंटों पे बोसों की नमी ठहरी हुई
सांस उलझी, ज़ुल्फ़ बिखरी, सिलवटें पोशाक पर

पानियों की साज़िशों ने जब भंवर डाले ‘फ़राज़’
तब्सिरा करते रहे सब डूबते तैराक पर…

Prerna Hindi Kahani : ”प्रेरणा ”

3

कहीं ख़ुलूस की ख़ुशबू मिले तो रुक जाऊं
मेरे लिए कोई आंसू खिले तो रुक जाऊं

मैं उस के साए में यूं तो ठहर नहीं सकता
उदास पेड़ का पत्ता हिले तो रुक जाऊं

कभी पलक पे सितारे कभी लबों पे गुलाब
अगर न ख़त्म हों ये सिलसिले तो रुक जाऊं

वो एक रब्त जो इतना बढ़ा कि टूट गया
सिमट के जोड़ दे ये फ़ासले तो रुक जाऊं

बहुत तवील अंधेरों का है सफ़र ‘ताहिर’
कहीं जो धूप का साया मिले तो रुक जाऊं…

Prabhat

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