Hindi Poetry : उम्र-भर साथ रहा दर्द महाजन की तरह…

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गोपालदास “नीरज” जिनके बिना हर कवि सम्मेलन का मंच एक दम सूना लगता था। गोपालदास नीरज हिन्दी साहित्यकार, शिक्षक, एवं काव्य वाचक थे। उन्होंने हिंदी फिल्मों के गीतों का लेखन भी किया। शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में गोपालदास “नीरज” को भारत सरकार ने पद्म श्री और पद्म भूषण से नवाजा। इतना ही नहीं उन्हें फिल्मों में सर्वश्रेष्ठ गीत लेखन के लिए एक या दो नहीं बल्कि लगातार तीन बार फिल्म फेयर पुरस्कार भी दिया गया। उनकी ग़ज़लें आज भी लोगों के ज़हन में बसी हुई हैं।

1

जब चले जाएँगे हम लौट के सावन की तरह
याद आएँगे प्रथम प्यार के चुम्बन की तरह

ज़िक्र जिस दम भी छिड़ा उन की गली में मेरा
जाने शरमाए वो क्यूँ गाँव की दुल्हन की तरह

मेरे घर कोई ख़ुशी आती तो कैसे आती
उम्र-भर साथ रहा दर्द महाजन की तरह

कोई कंघी न मिली जिस से सुलझ पाती वो
ज़िंदगी उलझी रही ब्रह्मा के दर्शन की तरह

दाग़ मुझ में है कि तुझमें ये पता तब होगा
मौत जब आएगी कपड़े लिए धोबन की तरह

हर किसी शख़्स की क़िस्मत का यही है क़िस्सा
आए राजा की तरह जाए वो निर्धन की तरह

जिस में इंसान के दिल की न हो धड़कन ‘नीरज’
शायरी तो है वो अख़बार के कतरन की तरह…

2

बदन पे जिस के शराफ़त का पैरहन देखा
वो आदमी भी यहाँ हम ने बद-चलन देखा

ख़रीदने को जिसे कम थी दौलत-ए-दुनिया
किसी कबीर की मुट्ठी में वो रतन देखा

मुझे मिला है वहाँ अपना ही बदन ज़ख़्मी
कहीं जो तीर से घायल कोई हिरन देखा

बड़ा न छोटा कोई फ़र्क़ बस नज़र का है
सभी पे चलते समय एक सा कफ़न देखा

ज़बाँ है और, बयाँ और, उस का मतलब और
अजीब आज की दुनिया का व्याकरन देखा

लुटेरे-डाकू भी अपने पे नाज़ करने लगे
उन्होंने आज जो संतों का आचरन देखा

जो सादगी है कुहन में हमारे ऐ ‘नीरज’
किसी पे और भी क्या ऐसा बाँकपन देखा…

3

जितना कम सामान रहेगा
उतना सफ़र आसान रहेगा

जितनी भारी गठरी होगी
उतना तू हैरान रहेगा

उस से मिलना नामुमकिन है
जब तक ख़ुद का ध्यान रहेगा

हाथ मिलें और दिल न मिलें
ऐसे में नुक़सान रहेगा

जब तक मंदिर और मस्जिद हैं
मुश्किल में इंसान रहेगा

‘नीरज’ तू कल यहाँ न होगा
उस का गीत विधान रहेगा…

गोपालदास “नीरज”

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