Hindi Poetry : तूने कहा तो जी उठे, तूने कहा तो मर गए…

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अदीम हाशमी (Best Poems Of Adeem Hashmi) उर्दू मुशायरों का एक जाना-माना नाम है। हालांकि उनका नाम लोग कम ही जानते हैं लेकिन उनकी ग़ज़लें आज भी लोगों के दिलों में प्यार का चिराग रोशन कर देते हैं।

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Best Poems Of Adeem Hashmi :

1

आंखों में आंसुओं को उभरने नहीं दिया,
मिट्टी में मोतियों को बिखरने नहीं दिया,

जिस राह पर पड़े थे तेरे पांव के निशाँ,
इस राह से किसी को गुज़रने नहीं दिया,

चाहा तो चाहतों की हदों से गुज़र गए,
नश्शा मोहब्बतों का उतरने नहीं दिया,

हर बार है नया तेरे मिलने का ज़ाइक़ा,
ऐसा समर किसी भी शजर ने नहीं दिया,

ये हिज्र है तो इस का फ़क़त वस्ल है इलाज,
हम ने ये ज़ख़्म-ए-वक़्त को भरने नहीं दिया,

इतने बड़े जहान में जाएगा तू कहां,
इस इक ख़याल ने मुझे मरने नहीं दिया,

साहिल दिखाई दे तो रहा था बहुत क़रीब,
कश्ती को रास्ता ही भँवर ने नहीं दिया,

जितना सुकूं मिला है तेरे साथ राह में,
इतना सुकून तो मुझे घर ने नहीं दिया,

इस ने हंसी-हंसी में मोहब्बत की बात की,
मैं ने ‘अदीम’ उस को मुकरने नहीं दिया…

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2

तेरे लिए चले थे हम तेरे लिए ठहर गए,
तूने कहा तो जी उठे, तूने कहा तो मर गए,

कट ही गई जुदाई भी, कब ये हुआ कि मर गए
तेरे भी दिन गुज़र गए, मेरे भी दिन गुज़र गए,

तू भी कुछ और, और है, हम भी कुछ और, और हैं
जाने वो तू किधर गया, जाने वो हम किधर गए,

राहों में ही मिले थे हम, राहें नसीब बन गईं
वो भी न अपने घर गया, हम भी न अपने घर गए,

वक़्त ही जुदाई का इतना तवील हो गया
दिल में तेरे विसाल के, जितने थे ज़ख़्म भर गए,

होता रहा मुक़ाबला, पानी का और प्यास का
सहरा उमड़-उमड़ पड़े, दरिया बिफर-बिफर गए,

वो भी ग़ुबार-ए-ख़्वाब था, हम भी ग़ुबार-ए-ख़्वाब थे
वो भी कहीं बिखर गया, हम भी कहीं बिखर गए,

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कोई कनार-ए-आबजू बैठा हुआ है सर-निगूँ
कश्ती किधर चली गई, जाने किधर भँवर गए,

आज भी इन्तजार का वक़्त हुनूत हो गया,
ऐसा लगा कि हश्र तक, सारे ही पल ठहर गए,

बारिश-ए-वस्ल वो हुई, सारा ग़ुबार धुल गया
वो भी निखर-निखर गया, हम भी निखर-निखर गए,

आब-ए-मुहीत-ए-इश्क़ का बहर अजीब बहर है
तैरे तो ग़र्क़ हो गए, डूबे तो पार कर गए

इतने क़रीब हो गए, अपने रक़ीब हो गए
वो भी ‘अदीम’ डर गया, हम भी ‘अदीम’ डर गए,

उस के सुलूक पर ‘अदीम’ अपनी हयात ओ मौत है
वो जो मिला तो जी उठे, वो न मिला तो मर गए…

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