नारी का दर्द बयां करती कविता

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हर घर में नारी के सपनें खुद का इक आकाश चुनें,
बाप का सीना बनें हिमालय हर बेटी विश्वास बुनें।  (Hindi Poem On Women Pain)

मुझे भी हक़ है अपने हिस्से का तो जीवन  जीने का,
मुझे भी हक़ है बयाँ करूँ मैं अपना दुख तो सीने का।

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किसी भी गुड़िया को फुसलानें वाला ना शैतान मिले,
ऐसी गन्दी नियत हो जिसकी फाँसी का फरमान  मिले।

सूनी हो गर राह मगर मैं फिर भी ना घबराऊँ,
गन्दी नियत से सरे राह आते जाते ना घूरी जाऊँ।

बेटी हूँ बस इसी वजह से मुझे भ्रूण में मत मारो,
दहेज़ के लालच में नारी को कभी भी मत दुत्कारो। (Hindi Poem On Women Pain)

जला हुवा एसिड से चेहरा सहन नहीं कर सकती,
अस्मत लुट जानें पर जीवन वहन नहीं कर सकती।

हर नारी है पूज्य हमारी उनका ना अपमान करें,
मत पूजो तो कम से कम हर नारी का सम्मान करें।

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ये प्राण दायिनी है जननी है धात्री प्रसू पुनीता है,
ये खुद में इतनी पावन जितनी गौ गंगा गीता है। (Hindi Poem On Women Pain)

नारी ही है प्यार बहन का माँ के आँचल की छाया है,
नारी से ही नर जाया है फिर भी इसने क्या पाया है।

(साभार:  अभिषेक सिंह द्वारा लिखित कविता “नारी”)

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-Mradul tripathi

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