Harivansh Rai Bachchan Poem : पढ़कर होगा अद्भुत अनुभव

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साहित्य जगत में काव्य एक ऐसी विधा है, जो सुनने वालों के कानों में मानो रस घोल देती है| भारत में कई साहित्यकार, गीतकार और कवि हुए हैं, जिनकी उत्कृष्ट रचनाओं ने  साहित्य जगत में काफी ऊंचा मुकाम हासिल किया है| ऐसे ही सुविख्यात कवि हैं हरिवंशराय बच्चन, जिनकी ‘मधुशाला’ को हिंदी भाषा के क्षेत्र में मील का पत्थर माना जाता है, जिसे सभी ने सुन रखा है, परंतु हम आपको उनकी एक अन्य रचना (Harivansh Rai Bachchan Poetry Halahal ) का ज़िक्र करेंगे|  

काग़ज़ की एक नाव हूं…

यह कविता है  “हलाहल” (Harivansh Rai Bachchan Poetry Halahal )| ऐसा माना जाता है कि इनकी कविताओं ने भारतीय साहित्य में परिवर्तन किया था, इनकी शैली पूर्व कवियों से भिन्न थी इसलिए इन्हें नयी सदी का रचयिता कहा जाता है|  इनकी रचनाओं ने भारत के काव्य में नई धारा का संचार किया|

हलाहल (Harivansh Rai Bachchan Poetry Halahal )

जगत-घट को विष से कर पूर्ण

जगत-घट, तुझको दूं यदि फोड़

हिचकते औ’ होते भयभीत

हुई थी मदिरा मुझको प्राप्‍त

कि जीवन आशा का उल्‍लास

जगत है चक्‍की एक विराट

रहे गुंजित सब दिन, सब काल

नहीं है यह मानव का हार

हलाहल और अमिय, मद एक

सुरा पी थी मैंने दिन चार

देखने को मुट्ठीभर धूलि

उपेक्षित हो क्षिति के दिन-रात

आसरा मत ऊपर का देख

कहीं मैं हो जाऊं लयमान

और यह मिट्टी है हैरान

पहुंच तेरे अधरों के पास

तो आशा है कि आप को इस कविता को पढ़कर काफी आनंद आया होगा|

जब आँख ही से न टपका…

10 चुनिंदा शेर

अंकुर उपाध्याय

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