मैय्यत के बहाने…..

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वो हफ्तेभर की थकान के बाद संडे का आना
वो आलस, वो नींद का मिला ख़जाना
वो चाय की चुस्की,वो पालक की पकोड़ी के साथ
अख़बार की एक-एक ख़बर को चबाना
वो गुनगुनी सुबह से महकती शाम तक
अजगर बनने का सपना सजाना
अर्थात टोटल रिलेक्स वाला संडे मनाना

तभी बजी दरवाज़े की घंटी
था पड़ोसी का लड़का बंटी
बंटी के आते ही हमारे संडे पर ख़तरा मंडराया
बहाना, नहीं सकते थे रच
क्योकि घटना थी बड़ी दुखी और सच
बंटी बोला सामने वाले शर्माजी गुज़र गए
और हमारे संडे के दिली अरमा दिल में बिखर गए

हमारी श्रीमती जी के हाथों सफ़ेद कुरता पायजामा आया
याने हमे भी दुःख और सेड का जामा पहनाया
जाते-जाते हमे रोका फिर टोका कि सिर्फ रो-धो कर मत चले आना
अपनी छुटकी हो गई है बड़ी                                                                                                                                                       ज़रा,जात वाले लड़को पर भी नज़र मार आना

हम गए शर्माजी के घर
माहौल ग़मगीन था
हर कोई दिख रहा दीनहीन था
हम पर भी बड़प्पन बहुत आया
शर्माजी के सिरहाने बैठे
उनके बेटे की चिकनी चाँद पर हाथ घुमाया
और बड़े प्यार से समझाया  
अरे बेटा सब थी ऊपरवाले की मर्ज़ी
तो बेटा बोला ऊपरवाला मकान तो खाली था
नीचेवाले किरायदार ने किराये के लिए इतना सताया
कि पिताजी को दिल का दौरा आया
पिताजी कमज़ोर थे दर्द सह नहीं पाए
और पहले ही अटेक में
दुनिया को कर गए बाय-बाय

हमने सोचा भीड़ बढ़ने से पहले हम भी उठ जाये
किसी ठंडी,गद्देदार जगह पर जाकर बैठ जाये
वफादार श्वान की तरह,बीवी का हुक्म बजाए
तभी जागी एक आस
जब पंडितजी खुद आये,हमारे पास
बोले आपकी कन्या के लिए एक वर है बड़ा ख़ास
वो जो शर्माजी के मृत शरीर को नहलाधुला रहे है
अपने इंजिनियर बेटे के लिए सुकन्या का पता लगा रहे है
कर लो बात, पक्की कर लो मुलाकात
आज शर्माजी की मैय्यत उठा लो
कल शादी की मीटिंग बुला लो
मैय्यत के उठते-उठते हमारी टोली, लड़केवालों में मिक्स हो गई
और चिता के जलते-जलते, शादी की तारीख भी फिक्स हो गई
तब दिल में ये ख़्याल आया
संडे बिगाड़कर, मैय्यत में आना काम आया
अरे जो काम जिंदगी ना कर सकी
वो काम शर्माजी की मौत ने कर दिखाया
इधर उनका दसवा उधर हमारे घर, शादी का शगुन आया
अरे मैय्यत के बहाने ही सही
हमने दूल्हा तो पाया
मैय्यत के बहाने ही सही
हमने दूल्हा तो पाया …..|

विशम्भर नाथ तिवारी

कला सम्पादक

शरद दर्शा रहा संघर्ष और तैयारी

पुकार रहा ये मन, तुझे हे कृष्णा!

युवाओं को ऊर्जान्वित करती कविता

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