Swami Vivekananda Doha : स्वामी विवेकानंद के लिए लिखे गए दोहे

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उठो, जगो, आगे बढ़ो, पाओ जीवन-साध्य

तुमने कहा कि राष्ट्र ही, एकमेव आराध्य

देश की बकरियों के भविष्य पर गंभीरता से विचार

साँस-साँस में राष्ट्रहित, शब्द-शब्द में ज्ञान

राष्ट्रवेदिका पर किए, अर्पित तन मन प्राण

 

सत्य और संस्कृति हुए, पाकर तुम्हें महान

कदम मिलाकर चल पड़े, धर्म और विज्ञान

 

देव संस्कृति का किया, तप-तप कर उत्थान

करता है दिककाल भी, ॠषि तेरा जयगान

Hindi Kahani : मैंने उसी क्षण डॉक्टर साहब की पग-धूलि का स्पर्श किया

अनथक यात्री ने कभी, लिया नहीं विश्राम

दिशा-दिशा के वक्ष पर, लिखा तुम्हारा नाम

 

रोम-रोम पुलकित हुआ, गाकर दिव्य चरित्र

जन्म तुम्हें देकर हुई, भारत भूमि पवित्र

 

संत विवेकानंद तुम, शुभ-संस्कृति का कोष

गुँजा दिया इस सृष्टि में, भारत का जय घोष

अश्रु यह पानी नहीं है, यह व्यथा चंदन नहीं है!

(साभार- रामसनेही शर्मा’यायावर’ द्वारा स्वामी विवेकानंद के लिए लिखे गए दोहे)

-Mradul tripathi

 

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