लाज़वाब गज़लों के शायर ‘शहरयार’, आप भी पढ़ें

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अख़लाक़ मुहम्मद ख़ान पूरी दुनिया में ‘शहरयार’ (Akhlaq Mohammed Khan Top 5 Best Gazals) के नाम से जाने गए | वे एक शिक्षाविद और उर्दू शायरी के सुनाम दिग्गज थे | उनकी पैदाइश 16 जून, 1936 को  बरेली जिले के अलोनी में हुई थी | उर्दू के इस अज़ीम शायर ने सभी पहलुओं पर अपनी बेबाक शायरी कही है। खुदा, मोहब्बत, जन्नत, ख्वाब, दीवानगी, इश्क आदि ऐसे मुकाम हैं, जिन्हें उन्होंने अपनी नज़्मों में एक दार्शनिक अंदाज दिया है।

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पढ़ें उनकी लाज़वाब गज़लें (Akhlaq Mohammed Khan Top 5 Best Gazals)

दिल चीज़ क्या है…(Shahryar beautiful ghazal read)

दिल चीज़ क्या है आप मेरी जान लीजिये
बस एक बार मेरा कहा मान लीजिये

इस अंजुमन में आपको आना है बार-बार
दीवार-ओ-दर को ग़ौर से पहचान लीजिये

माना के दोस्तों को नहीं दोस्ती का पास
लेकिन ये क्या के ग़ैर का एहसान लीजिये

कहिये तो आसमाँ को ज़मीं पर उतार लाएँ
मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिये

सीने में जलन…(Shahryar beautiful ghazal read)

सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है
इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यूँ है

दिल है तो धड़कने का बहाना कोई ढूँढे
पत्थर की तरह बेहिस-ओ-बेजान सा क्यूँ है

तन्हाई की ये कौन सी मन्ज़िल है रफ़ीक़ो
ता-हद्द-ए-नज़र एक बयाबान सा क्यूँ है

हम ने तो कोई बात निकाली नहीं ग़म की
वो ज़ूद-ए-पशेमान पशेमान सा क्यूँ है

क्या कोई नई बात नज़र आती है हम में
आईना हमें देख के हैरान सा क्यूँ है

Hasrat Jaipuri को और सुनने की हसरत रह गई

जुस्तजू जिस की थी…(Shahryar beautiful ghazal read)

जुस्तजू जिस की थी उस को तो न पाया हमने
इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हमने

तुझको रुसवा न किया ख़ुद भी पशेमाँ न हुये
इश्क़ की रस्म को इस तरह निभाया हमने

कब मिली थी कहाँ बिछड़ी थी हमें याद नहीं
ज़िन्दगी तुझको तो बस ख़्वाब में देखा हमने

ऐ “अदा” और सुनाये भी तो क्या हाल अपना
उम्र का लम्बा सफ़र तय किया तन्हा हमने

कटेगा देखिए दिन…(Shahryar beautiful ghazal read)

कटेगा देखिए दिन जाने किस अज़ाब के साथ
कि आज धूप नहीं निकली आफ़ताब के साथ

तो फिर बताओ समंदर सदा को क्यूँ सुनते
हमारी प्यास का रिश्ता था जब सराब के साथ

बड़ी अजीब महक साथ ले के आई है
नसीम, रात बसर की किसी गुलाब के साथ

फ़िज़ा में दूर तक मरहबा के नारे हैं
गुज़रने वाले हैं कुछ लोग याँ से ख़्वाब के साथ

ज़मीन तेरी कशिश खींचती रही हमको
गए ज़रूर थे कुछ दूर माहताब के साथ

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ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में…(Shahryar beautiful ghazal read)

ज़िन्दगी जब भी तेरी बज़्म में लाती है हमें
ये ज़मीं चाँद से बेहतर नज़र आती है हमें

सुर्ख़ फूलों से महक उठती हैं दिल की राहें
दिन ढले यूँ तेरी आवाज़ बुलाती है हमें

याद तेरी कभी दस्तक कभी सरगोशी से
रात के पिछले पहर रोज़ जगाती है हमें

हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई क्यूँ है
अब तो हर वक़्त यही बात सताती है हमें

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