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Ashfaqulla Khan Poem : कस ली है कमर अब तो, कुछ करके दिखाएँगे

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हिन्दू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश करने वाले शहीद अशफाक उल्ला खां की कुर्बानी पर आज हर कोई फक्र करता है.अशफाक (Ashfaqulla Khan Poem) का जन्म शाहजहांपुर शहर के मोहल्ला एमन जई जलाल नगर में 22 अक्टूबर 1900 को हुआ था. उनके पिता का नाम शफीक उल्ला खान और मां का नाम मजहूरुन्न्‍िाशां बेगम था. आज उनके जन्मदिवस पर उनके द्वारा लिखित एक जोश भर देने वाली कविता ‘ ‘ऐलान-ए-इंकलाब’

रंगमंच पर सभी जमूरे, आह! ज़िन्दगी बनी नटी.

कस ली है कमर अब तो, कुछ करके दिखाएँगे

,आज़ाद ही हो लेंगे, या सर ही कटा देंगे।

.हटने के नहीं पीछे, डर कर कभी ज़ुल्मों से,

.तुम हाथ उठाओगे, हम पैर बढ़ा देंगे।

.बेशस्त्र नहीं है हम, बल है हमें चरख़े का,

.चरख़े से जमीं को हम, ता चर्ख गुँजा देंगे।

.परवा नहीं कुछ दम की, गम की नहीं, मातम की है

जान हथेली पर, एक दम में गवाँ देंगे।

.उफ़ तक भी जुबां से हम हरगिज़ न निकालेंगे

,तलवार उठाओ तुम, हम सर को झुका देंगे।

.सीखा है नया हमने लड़ने का यह तरीका,

.चलवाओ गन मशीनें, हम सीना अड़ा देंगे।

.दिलवाओ हमें फाँसी, ऐलान से कहते हैं,

.खूं से ही हम शहीदों के, फ़ौज बना देंगे।

.मुसाफ़िर जो अंडमान के तूने बनाए ज़ालिम,

.आज़ाद ही होने पर, हम उनको बुला लेंगे।

.

(साभार:शहीद-ए-वतन अशफाक उल्ला खाँ की प्रसिद्ध कविता ‘ऐलान-ए-इंकलाब’)

जो तेरा है वो तुझ तक इक दिन आएगा ही आएगा

-Mradul tripathi

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