Hindi Poem : इस सोते संसार बीच, जग कर सज कर रजनी बाले

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इस सोते संसार बीच
जग कर सज कर रजनी बाले!
कहाँ बेचने ले जाती हो
ये गजरे तारों वाले?

मोल करेगा कौन
सो रही हैं उत्सुक आँखें सारी
मत कुम्हलाने दो
सूनेपन में अपनी निधियाँ न्यारी

इस सोते संसार बीच, जग कर सज कर रजनी बाले

निर्झर के निर्मल जल में
ये गजरे हिला हिला धोना
लहर हहर कर यदि चूमे तो
किंचित् विचलित मत होना

होने दो प्रतिबिम्ब विचुम्बित
लहरों ही में लहराना
‘लो मेरे तारों के गजरे’
निर्झर-स्वर में यह गाना

Hindi Poem : जब-जब सिर उठाया, अपनी चौखट से टकराया

यदि प्रभात तक कोई आकर
तुम से हाय! न मोल करे
तो फूलों पर ओस-रूप में
बिखरा देना सब गजरे

(साभार: रामकुमार वर्मा द्वारा लिखित कविताओं में से एक ‘ये गजरे तारों वाले’)

Hindi Kahani : हिन्दुस्तान में एक ऐसी जगह है जहां उस्तरे बनते हैं

-Mradul tripathi

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