जब तक मानव नहीं उठेगा, अपने हक़ को नहीं लड़ेगा

0

जब तक मानव नहीं उठेगा, (Jab Tak Manava Nahi Uthega)
अपने हक़ को नहीं लड़ेगा,
होगा तब तक उसका अपमान,
कब तक मदद करे भगवान।

नहीं यहां कोई तरस है खाता,
खून के प्यासे भ्राता भ्राता,
गूँगे यहाँ पैरवी करते,
बहरा फैसला है सुनाता,
जानते हैं सब सच्चाई को,
फिर भी बनते हैं अनजान,
कब तक मदद करे भगवान। (Jab Tak Manava Nahi Uthega)

दोषी को निर्दोष बताते,
सच्चाई को सदा छुपाते,
दिखा अमीरी की ताक़त को,
हम सबकी आवाज़ दबाते,
तनिक विरुद्ध जो इनके जायें,
कर देते जीवन शमशान,
कब तक मदद करे भगवान।

बहुत हुआ चल अब तो जागें,
रणभूमि से पीछे न भागें,
सदा साथ सत्य का दे तू,
चाहें गुरु ही हो तेरे आगे,
उठा हाथ में तीर- कमान,
कब तक मदद करे भगवान।

(साभार: अभिषेक कुमार अम्बर द्वारा लिखित कविता “जब तक मानव नहीं उठेगा”)

Hindi Poem : ख़ुद को आख़िर इतना मजबूर क्यूँ होने दें

Hindi Poem : एक किताब है ज़िन्दगी बनते बिगड़ते हालातों का हिसाब है जिंदगी

Hindi Poem : छिप-छिप अश्रु बहाने वालों, मोती व्यर्थ बहाने वालों

-Mradul tripathi

Share.