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Hindi Poem : हाँ मैं इस देश का वासी हूँ, इस माटी का क़र्ज़ चुकाऊंगा

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हाँ मैं इस देश का वासी हूँ, इस माटी का क़र्ज़ चुकाऊंगा

जीने का दम रखता हूँ, तो इस के लिए मरकर भी दिखलाऊंगा ।।

नज़र उठा के देखना, ऐ दुश्मन मेरे देश को

मरूँगा मैं जरूर पर… तुझे मार कर हीं मरूँगा ।।

कसम मुझे इस माटी की, कुछ ऐसा मैं कर जाऊंगा

हाँ मैं इस देश का वासी हूँ, इस माटी का क़र्ज़ चुकाऊंगा ।।

आशिक़ तुझे मिले होंगे बहुत, पर मैं ऐसा कहलाऊंगा

सनम होगा मेरा वतन और मैं दीवाना कहलाऊंगा ।।

माया में फंसकर तो मरता हीं है हर कोई

पर तिरंगे को कफ़न बना कर मैं शहीद कहलाऊंगा ।।

हाँ इस देश का वासी हूँ, इस माटी का क़र्ज़ चुकाऊंगा ।

मेरे हौसले न तोड़ पाओगे तुम, क्योंकि मेरी शहादत हीं अब मेरा धर्म है ।।

सीमा पर डटकर खड़ा हूँ, क्योंकि ये मेरा वतन है

ऐ मेरे देश के नौजवानों अब आंसू न बहाओ तुम ।।

सेनानियों की शाहदत का अब कर्ज चुकाओ तुम

हासिल करो विश्वास तुम, करो देश के दर्द का एहसास तुम ।।

सपना हो हिन्द का सच, दुश्मनों का करो विनाश तुम

उठो तुम भी और मेरे साथ कहो, कुछ ऐसा मैं भी कर जाऊंगा ।।

हाँ इस देश का वासी हूँ, इस माटी का क़र्ज़ चुकाऊंगा

ऐ देश के दुश्मनों ठहर जाओ…. संभल जाओ ।।

मैं इस देश का वासी हूँ, अब चुप नहीं रह जाऊंगा

आंच आई मेरे देश पर तो खून मैं बहा दूंगा ।।

क्योंकि अब बहुत हुआ, अब मैं चुप नहीं रह जाऊंगा

हाँ इस देश का वासी हूँ, इस माटी का क़र्ज़ चुकाऊंगा ।।

खून खौलता है मेरा, जब वतन पर कोई आंच आती है

कतरा कतरा बहा दूंगा, फिर दिल से आवाज आती है ।।

इस माटी का बेटा हूँ मैं, इस माटी में ही मिल जाऊंगा

आँख उठा के देखे कोई, सबको मार गिराऊंगा ।।

भारत का मैं वासी हूँ, अब चुप नहीं रह पाउँगा

अब चुप नहीं रह पाउँगा, अब चुप नहीं रह पाउँगा ।।

(साभार: आँचल वर्मा द्वारा लिखित कविता ‘हाँ मैं इस देश का वासी हूँ’)

अधिकांश लोगों ने मान लिया था कि वह पगला चुका है

-Mradul tripathi

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