Hindi Kahani : डूबते को चाहिए बस एक तिनके का सहारा

0

डूबते को चाहिए बस

एक तिनके का सहारा

ताकि मिल जाये किनारा।

लीडर एक खास किस्‍म का समझदार जंतु होता है

जीत की दुर्गम डगर में

छोड़ता खुद को लहर में

चाहता है बच निकलना

डूबता जब वह भँवर में

आ हीं जाता है निकलकर

लक्ष्य ने जिसको पुकारा।

 

लिपटते शैवाल पग में

लक्ष्य का संधान मग में

आस की बिजली चमककर

दौड़-सी जाती है रग में

है दमकता रूप उसका

दर्द ने जिसको निखारा।

खद्दर की चादर ओढ़े, हाथ में माला लिए शाहनी

धार के विपरीत चलकर

दर्द चुटकी से मसलकर

पहुँचता है लक्ष्य पर जब

खुद से हीं गिरकर संभलकर

जो समय को साथ कर ले

वक़्त ने उसको सँवारा।

(साभार: अनीता सिंह द्वारा लिखित कविता ‘डूबते को चाहिये बस’)

उसके फाटक पर इंद्रधनुषी आकार के बोर्ड लगे हुए हैं

-Mradul tripathi

Share.