सिलसिला ख़त्म हुआ जलने जलाने वाला…

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एक ऐसा नाम जो उर्दू मुशयरों का सबसे जरूरी हिस्सा है वह है शायर इकबाल अशहर। इक़बाल अशहर सबसे लोकप्रिय शायरों में शुमार हैं। उनके बिना कोई भी मुशायरा मानों फीका सा लगता है। इकबाल अशहर द्वारा कई ग़ज़लें और शेर कहे जा चुके हैं। इकबाल अशहर की ग़ज़लों में ऐसी कैफियत है जो भी इन्हें एक बार सुन लेता है, वह किसी अलग ही दुनिया में खो जाता है। पेश है इकबाल अशहर द्वारा लिखी एक ग़ज़ल।

सिलसिला ख़त्म हुआ जलने जलाने वाला
अब कोई ख़्वाब नहीं नींद उड़ाने वाला,

ये वो सहरा है सुझाए न अगर तू रस्ता
ख़ाक हो जाए यहां ख़ाक उड़ाने वाला,

क्या करे आंख जो पथराने की ख़्वाहिश न करे
ख़्वाब हो जाए अगर ख़्वाब दिखाने वाला,

याद आता है कि मैं ख़ुद से यहीं बिछड़ा था
यही रस्ता है तेरे शहर को जाने वाला,

ऐ हवा उस से यह कहना कि सलामत है अभी
तेरे फूलों को किताबों में छुपाने वाला,

ज़िंदगी अपनी अंधेरों में बसर करता है
तेरे आंचल को सितारों से सजाने वाला,

सभी अपने नज़र आते हैं ब-ज़ाहिर लेकिन
रूठने वाला है कोई न मनाने वाला,

ले गईं दूर बहुत दूर हवाएं जिस को
वही बादल था मेरी प्यास बुझाने वाला।

– इक़बाल अशहर

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