चाणक्य के जीवन का प्रेरक प्रसंग 

0

दुनिया आज चाणक्य नीति को बड़े गौर से पढ़ती है और उसे आत्मसाध करने की कोशिश भी करती है  किन्तु चाणक्य यूं ही महान नहीं हुए हैं | वे अपने निजी जीवन में भी उतने ही ईमानदार, कर्मठ और राजभक्त थे | एक समय की बात है चाणक्य अपनी कुटिया में रात के समय राज्य के आवश्यक कार्य में लगे हुए थे और दीपक की रोशनी में अपने काम में तल्लीन थे |

तभी राजा के दरबार से एक सिपाही अपनी निजी समस्या लेकर उनके पास आया | चाणक्य को प्रणाम कर वह समस्या सुनाने ही वाला था कि उसे बीच में टोकते हुए चाणक्य ने काम ख़त्म करने तक रुकने को कहा | सिपाही अब इंतज़ार करने लगा | जब काम ख़त्म हुआ तो चाणक्य ने तुरंत दीपक बुझाया | कुटिया में अब घोर अँधेरा था | सिपाही ने तपाक से पूछा कि आपने दीपक क्यों बुझा दिया| मैंअपनी एक समस्या लेकर आपके पास आया हूं| तब चाणक्य ने जवाब दिया कि अभी तक मैं राज्य का कार्य कर रहा था इसलिए राज्य के तेल का उपयोग कर रहा था | अब मैं तुमसे निजी बात कर रहा हूं, जिसके लिए मैं राज्य की संपत्ति का उपयोग नहीं कर सकता हूं|

चाणक्य कभी राजा को एक दो बून्द तेल का हिसाब नहीं देने वाले थे और न ही उनसे पूछा जाता किन्तु उन्होंने राज्य के प्रति अपनी वफ़ादारी और जिम्मेदारी को निभाते हुए यह कदम उठाया था | कहने का तात्पर्य यह है कि आप बड़ी-बड़ी बातें तो कर सकते हैं, परन्तु पहले जीवन में खुद उन्हें जब तक आत्मसात नहीं करते, उनका कोई मोल नहीं है | साथ ही आप की स्वामी भक्ति, ईमानदारी और काम के प्रति तल्लीनता दिखावे भर के लिए न होकर आपके स्वभाव में होनी चाहिए |

चाणक्य भी पड़ गए चिंता में…

जब किस्मत में लिखे है “पकौड़े”, तो कहां तक दौड़े?

3 साल में बढ़ी 3 गुना ताकत

रहें हर खबर से अपडेट, ‘टैलेंटेड इंडिया’ के साथ| आपको यहां मिलेंगी सभी विषयों की खबरें, सबसे पहले| अपने मोबाइल पर खबरें पाने के लिए आज ही डाउनलोड करें Download Hindi News App और रहें अपडेट| ‘टैलेंटेड इंडिया’ की ख़बरों को फेसबुक पर पाने के लिए पेज लाइक करें – Talented India News

Share.