कटाक्ष : चमकी से मरने वाले बच्चे, महज़ गिनी जा चुकी लाशें !

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आम अवाम की जान कितनी सस्ती है, यह बात एक बार फिर बिहार का चमकी बुख़ार (chamki bukhar) समझा रहा है| बिहार सरकार ख़ामोश है और सवालों से बचने के लिए सीएम नीतीश (nitish kumar ) कार के फाटक को जल्दी से लगाकर दौरा किये जाने के कर्तव्य का निर्वहन कर चुके है| स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे की नज़र में भारत -पाक का मैच मासूमों की जान बचाये जाने से ज्यादा जरुरी था | बहरहाल बच्चों के मरने का सिलसिला जारी है |

बेलगाम बीमारी, बेबस इलाज और बेपरवाह सरकार शायद चमकी को बढ़ावा देने के काम में लगे है| एक और बात जो ज्यादातर मौकों की तरह सामान है, केंद्र की चुप्पी | कारण कई है, मसलन NDA में शामिल नीतीश सरकार और वैसे भी मोदी सरकार मुद्दों पर बात करने से परहेज ही करती रही है | राम मंदिर, बलात्कार, किसान आत्महत्या, बेरोज़गारी, आरक्षण जैसे मुद्दों पर जब भी देश जला, भाषणों के जादूगरों की सरकार के शीर्ष नेता या तो चुप रहे या विदेश दौरों पर | तारीख़े इसकी गवाह है|

Chamki Fever से 56 बच्चों की मौत, जानिये लक्षण और कैसे करें बचाव

( satire on chamki fever and nitish govt)  लेकिन वे जानते है, उनका विपक्ष मुद्दे भुनाऊ नहीं है| सो चिंता कैसी? सवाल यह भी की ईश्वर न करें चमकी किसी कांग्रेस शासित प्रदेश में होता, तब बीजेपी के प्रवक्ता न्यूज़ चैनल पर पानी पी-पीकर काम को सर-अंजाम देने से चूकते क्या? अब वे कहा है ? आम जनता के मसीहा बनने का दावा महज चुनाव प्रचार के दौरान हो किया जाता रहा है, उसका वास्तविकता से वास्ता काम ही रहता है| यह एक शाश्वत सत्य है|

सरकारों को पता है एक दिन यह बीमारी चली जाएगी और फिर जाँच और संवेदना के भाषण और ट्वीट कर देने से सब ठीक हो जायेगा| ज्यादा से ज्यादा मुआवजे का ऐलान और बस सब ख़त्म | शायद अच्छे दिन और आयुष्मान भारत का मतलब जनता कुछ और ही समझ गई थी | नादान है ना|

Chamki Bukhar : लक्षण, कारण, इलाज और बचाव?

फिर नई तबाही का इन्तजार और उस पर सियासत| लेकिन उजड़ चुकी उस ममता का क्या जिसकी आँखों के सामने उसके कलेजे का टुकड़ा तड़प-तड़प कर दम तोड़ गया और वो कुछ न कर सकी| पिता की उस छाती का क्या जो सिर्फ फटी नहीं है, बस फटने को है| ख़ैर, मरने वाले सरकारों के लिए महज गिनी जा चुकी लाशें है जो आंकड़ों में दर्ज हो चुके है| यह सब रोका जा सकता था| यक़ीनन कुछ हद तक तो…. लेकिन अफ़सोस….अवाम की सस्ती जान का मोल देना सियासत की फ़ितरत में नहीं है| चमकी जैसी महामारी हर बार नई तबाही अपने पीछे छोड़, साथ ही छोड़ जाती है कुछ जलते सवाल , जिनका जवाब आजाद भारत, विकासशील भारत, बढ़ता भारत, हमारा भारत आज भी ढूंढ रहा है ………….

Today Cartoon : चमकी बुखार पर नीतीश का शुतुरमुर्गासन

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