दूसरे ऑप्शन के अभाव में मिला प्रचंड जनादेश !

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लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2019) के पहले तमाम तरह की बातें की गई | सरकार की कई गलतियां उजागर करने की कोशिश की गई, मुद्दों से भटकाने की राजनीति, भगुवाकरण, हिन्दुवाद, राष्ट्रवाद और भी कई इल्ज़ाम लगे | विपक्ष की यही जिम्मेदारी भी है और चुनावी माहौल में यह और भी जरुरी था | लेकिन हुआ क्या ? मोदी ,,,मोदी ,,,,मोदी ,,,,की गूंज अब प्रचंड मतदान में बदल गई है और इतिहास रच दिया गया है|

आखिर हुआ क्या ? हार हो सकती है लेकिन इस तरह ? जनता में किसी नेता के प्रति इस कदर दीवानगी का कारण क्या है ? अब तक सांसद पीएम बनाते आये थे लेकिन पहली बार शायद पीएम ने सांसद बनाये | कुछ भी कहो मोदी के व्यक्तित्व में असर को नकारा नहीं जा सकता | वे कुछ मुद्दों पर गलत हो सकते है जिसका इकरार वे कई बार कर चुके है कि काम करने पर गलती हो सकती है| लेकिन देश की तमाम जनता एक साथ कैसे गलत हो सकती है |

चुनाव ड्यूटी से लौटी दोनों की बातचीत के मुख्य अंश

मोदी के प्रचंड समर्थन के कारणों की बात करें तो वे कई है, लेकिन मुख्य कारण है दूसरे ऑप्शन का बेहद कमजोर होना | जनता ने यह जान लिया की यदि मोदी का विरोध भी करते है तो किसे चुने ? दूसरों चेहरों में वह विश्वास, वो असर नहीं दीखता की मोदी को न चुना जाये | ऐसे में यह एक बड़ा कारण रहा जनादेश का एक दिशा में होने का |

सफलता की आदि हो चुकी बीजेपी अब फ़िलहाल नहीं रुकने वाली और विजन भी साफ है कि काम करना होगा तभी इनाम मिलेगा | विपक्ष का शीर्ष नेतृत्व हर मोर्चे पर नाकाम रहा | मोदी हटाओ के लिए जो कुछ संभव था किया गया जिसे जनता समझ रही थी| कहीं न कहीं विपक्ष की गालियां मोदी के गले का हार बन गई और विपक्ष की करारी हार का कारण |

कटाक्ष: श्रद्धांजलि का श्रद्धा से ताल्लुक है क्या ?

साथ ही जनता के मन में एक और कार्यकाल देने का मंसूबा भी बन गया था | 2014 की मार के बाद घायल विपक्ष पांच साल में विपक्ष खुद को खड़ा करने में ही लगा रहा, जिसमे भी कामयाब नहीं हुआ तो बीजेपी के विजय रथ को कैसे रोकता, वहीँ इसी बीच मोदी ने लोगों के दिलों में और जगह बना ली |

चुनाव से आगे अब क्या ?

माना किया कम और प्रचार ज्यादा किया, लेकिन किया तो ? यह बात जनता के मन में घर कर गई| अंततः जीत हुई एक प्रखर वक्ता, आइकॉन नेता, शानदार रणनीति , मजबूत संघठन और बेहद कारगर प्रचार तंत्र की,,,,,,, सचमुच ऐतिहासिक है, लेकिन अब काम करना होगा ,,,,,,,,,,,,,,,क्योंकिें ऐन मौके पर सेना की कामयाबी और सत्तर साल की नाकामी हर बार काम नहीं आती………….

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