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चुनाव ड्यूटी से लौटी दोनों की बातचीत के मुख्य अंश

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और कैसा रहा इस बार कामकाज ? ठीक रहा | कुछ गड़बड़ी तो नहीं हुई ना | नहीं मेरे साथ तो कुछ छेड़छाड़ नहीं हुई लेकिन मेरे पास वाली अचानक कहां चली गई आज तक पता नहीं है| वैसे कहा जा रहा है कि कुछ लोग रात के अंधेरे में आये थे और कम्बल में लपेटे उसे कहीं ले गए है| उसके बाद कोई खबर नहीं | अख़बारों की खबरें डरा रही है | पता नहीं कब किसे उठा लिया जाये ? सच कहा बहन, अब तो ड्यूटी पर जाने से पहले घबराहट होने लगती है | वैसे छेड़छाड़ वाली खबरें सही है क्या ? सही | मेरे कुनबे वाले नहीं मान रहे है कहते है ऐसा कुछ नहीं है लेकिन मेरे मौसी का परिवार वालों की राय इस पर कुछ और है|

कटाक्ष: श्रद्धांजलि का श्रद्धा से ताल्लुक है क्या ?

सच क्या है ? यह तो राम जाने या अपना मालिक जो हमें इस काम में लगाता है, लेकिन किसी के घर से, किसी होटल से, कहीं किसी ट्रक से अपने रिश्तेदारों का मिलना महज इत्तेफ़ाक़ तो नहीं | आग है तभी तो धुआँ है| सुना है मालिक भी दबाव में है और खुद कई इल्जाम झेल रहा है | हां | सुना तो है | अब आंख मूंद लेने का नाटक करना इतना आसान तो नहीं है| लेकिन बनाने वाले ने भी हमें क्या बनाया है ? आज हर किसी की नजर हम पर टिकी है| आते-जाते लोग ऐसे देखते है जैसे मौका मिलने पर ले ही उड़ेंगे …लेकिन जानते है हमारे सीने में महफूज राज इस मुल्क की तक़दीर लिखने वाले है|

चुनाव से आगे अब क्या ?

ख़ैर चलो छोड़ों इस मुल्क में हमें फिर कब काम पर लगा दिया जाये पता नहीं | मैं तो बहुत थक गई हूं थोड़ा आराम करना चाहती हूं | तुम्हारी पड़ोसन जिसे रात में उड़ा लिया गया था उसकी कोई खबर मिले तो बताना | फिर मिलते है………….और न्यूज़ चैनल पर ध्यान देना, अपनी बिरादरी की खबर अभी खूब छप रही है….Note:- यह उस बातचीत के मुख्य अंश है जो हाल ही में चुनाव ड्यूटी से लौटी एक EVM दूसरी से कर रही है|

व्यंग्य: मीडिया की उम्मीदें टूटी, मुंह से एक बात न फूटी

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